अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाबल
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रामबन जिले के भजमस्ता गांव के निवासी मुश्ताक अहमद अमरनाथ यात्रा का काफिला जो हर दिन बम-बम भोले के जयकारों और जश्न मनाते हुए गांव से निकलता है तो बहुत खुश होते हैं। सलमा को पूरे गांव में शांति और सुकून महसूस होता है। यह शांति लोगों को सेना के कारण मिल रहा है।
यदि 90 के दशक के उत्तरार्ध में पीरपंजाल के दक्षिण में इतना शांतिपूर्ण वातावरण नहीं था। पीरपंजाल के दक्षिण में पड़ने वाला क्षेत्र अमरनाथ यात्रा के लिए उत्साहित है क्योंकि अमरनाथ यात्रियों द्वारा तय की जाने वाली दूरी जम्मू से बनिहाल सुरंग तक सबसे अधिक है।
पूरे क्षेत्र की विशेषता ऊंची चोटियां हैं जो सड़क के समानांतर हैं जो आतंकवादियों को काफिले के करीब आने के लिए उपयुक्त भूभाग प्रदान करती है, जबकि राज्य पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और अन्य सहयोगी एजेंसियां यात्रियों की सुरक्षा के लिए सड़क पर तैनात हैं।
सेना की मुस्तैदी के कारण यात्रा के दौरान आतंकी वारदात देने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। आतंकवादी गतिविधि को रोकने के लिए दैनिक गश्त करती है जिसे सेना की भाषा में एरिया डोमिनेशन पेट्रोल के रूप में जाना जाता है।
इसमें उन्हें प्रारंभिक चेतावनी प्रदान करने के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पर्याप्त सहायता प्रदान की जाती है। पिछले साल जम्मू क्षेत्र के रियासी जिले के टक्सन ढोक में ग्रामीणों और सेना की मदद से लश्कर से जुड़े दो आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया था।
सेना की मौजूदगी के कारण ग्रामीण इस पर कार्रवाई करने के लिए सेना को जानकारी देते हैं। इस प्रकार अवाम और जवान किसी भी राष्ट्र विरोधी गतिविधि को विफल करने के लिए तैयार हैं।