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कश्मीर घाटी में अब तक 201 आतंकियों का सफाया, सेना का कड़ा सन्देश- सरेंडर करो नहीं तो मारे जाओगे

Thu, 15 Nov 2018 03:31 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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लेफ्टिनेंट जनरल ए.के.भट्ट - फोटो : फाइल
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जम्मू-कश्मीर में लगातार आतंकियों के खिलाफ जंग जारी है। इस साल सुरक्षा बलों ने अब तक 201 आतंकी मार गिराए हैं। भारतीय सेना ने कश्मीर में छिपे आतंकियों को कड़ा सन्देश देते हुए कहा है कि या तो सरेंडर करो या फिर मार दिए जाओगे। यह बात बुधवार को जीओसी चिनार कोर लेफ्टिनेंट जनरल ए.के.भट्ट ने एक निजी टीवी चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में कही।
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लेफ्टिनेंट जनरल भट्ट ने आतंकियों और कश्मीर के युवाओं को कड़ा सन्देश देते हुए कहा कि उन्हें आतंक का रास्ता छोड़ बढ़ते और उभरते भारत के साथ जुड़ना चाहिए। कश्मीर के युवाओं को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें अपने माता-पिता और खुद के सपनो को पूरा करने पर जोर देना चाहिए। कश्मीर में शांति सब के लिए एक बेहतर रास्ता है।

अलगाववादी और पाकिस्तान उन्हें कर रहे हैं गुमराह
लेफ्टिनेंट जनरल भट्ट ने कहा कि अलगाववादी और पाकिस्तान उन्हें गुमराह कर रहे हैं। उन्हें उन्नति में रुकावट का काम कर रहे हैं। वह कश्मीरी युवाओं को भारत के खिलाफ जंग में एक औजार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। युवाओं को खुद के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक बेहतर रास्ते को चुनने की जरूरत है।
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सुरक्षाबालों की चौकसी ही है सफल ऑपरेशन का साज
लेफ्टिनेंट जनरल भट्ट ने कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों की 24 घंटे और सातों दिन की चौकसी ही सफल ऑपरेशन का मूल मंत्र है। जम्मू-कश्मीर में सफल ऑपरेशन में सेना, पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और इंटेलिजेंस एजेंसीज की शक्ति ही काम आई है। जिसकी वजह से इस साल अब तक 201 आतंकी मारे जा चुके हैं।
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दक्षिण और उत्तरी कश्मीर में मारे गए सबसे अधिक आतंकी

रिपोर्ट्स के मुताबिक दक्षिण कश्मीर में अब तक 109 आतंकी मारे जा चुके हैं। वहीं उत्तरी कश्मीर में 45 आतंकी इस साल मारे गए हैं। अन्य आतंकी भी जम्मू-कश्मीर के विभिन्न ऑपरेशन में मार गिराए गए हैं। इसमें सबसे अधिक आतंकी लश्कर फिर जैश और हिजबुल के थे।

कश्मीरी लोगों का भी आतंकियों के खिलाफ मिल रहा योगदान
लेफ्टिनेंट जनरल भट्ट ने कहा कि कश्मीर के स्थानीय लोग भी अब अलगावादियों और आतंकियों से तंग आ चुके हैं। लोग अब जान चुके हैं कि उन्हें भारत के खिलाफ गलत तरीके से उपयोग में अलगावादियों और आतंकियों द्वारा लिया जा रहा है। ऐसे में अब हमे कश्मीरी लोगों का भी सहियोग मिल रहा है। वह सभी नफरत का रास्ता छोड़ शांति के मार्ग पर चलना चाहते हैं।
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