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J&K: किश्तवाड़ में जेसीओ के हत्यारों की तलाश में विशेष सुरक्षाबल उतारे, श्रीनगर और सोपोर में भी तलाशी अभियान

Tue, 12 Nov 2024 01:03 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

अधिकारियों ने कहा कि रविवार की मुठभेड़ के बाद से आतंकवादियों से संपर्क नहीं हुआ है। हत्याओं के लिए जिम्मेदार तीन से चार आतंकवादी अभी भी इलाके में छिपे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : संवाद
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विस्तार
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किश्तवाड़ के केशवान के जंगलों में बलिदान सेना की स्पेशल फोर्स के नायब सूबेदार (जेसीओ) राकेश कुमार के हत्यारों की तलाश में विशेष सुरक्षाबलों की अतिरिक्त टीम को लगाया गया है। उधर श्रीनगर व सोपोर में भी दहशतगर्दों की तलाश में अभियान जारी है। बताया जा रहा है कि सेना की तरफ से कुछ पैरा कमांडो को हेलिकाॅप्टर से घटनास्थल के पास की पहाड़ी पर उतारा गया था। फिलहाल सुरक्षाबलों को कोई उल्लेखनीय सफलता नहीं मिली है। सुरक्षाबलों को मौके से कुछ नहीं मिला है।

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उधर श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र इश्बर निशात के जबरवान वन क्षेत्र में रविवार तड़के हुई एक संक्षिप्त मुठभेड़ मामले में सोमवार को भी आतंकियों की तलाश जारी रही। सोपोर के रामपुरा राजपोरा के वन क्षेत्र में भी लगातार तीसरे दिन दहशतगर्दों को तलाशने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

ग्राम सुरक्षा गार्डों की मौत के जिम्मेदार आतंकियों को ढेर करने के लिए सोमवार को सुरक्षाबलों ने किश्तवाड़ के केशवान और आसपास के इलाकों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों ने कहा कि रविवार की मुठभेड़ के बाद से आतंकवादियों से संपर्क नहीं हुआ है। हत्याओं के लिए जिम्मेदार तीन से चार आतंकवादी अभी भी इलाके में छिपे हैं। इन्हें मार गिराने के लिए सेना और सुरक्षाबलों के जवान जंगल का पत्ता-पत्ता छान रहे हैं।
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अधिकारियों ने कहा कि केशवान के जंगल घने होने के चलते तलाशी अभियान में चुनौती है। जानकारी के अनुसार वीरवार शाम को आतंकवादियों ने वीडीजी नजीर अहमद और कुलदीप कुमार की कुंतवाड़ा के जंगल में अपहरण के बाद हत्या कर दी थी।

बलिदानी जेसीओ को दी अंतिम विदाई
आतंकी मुठभेड़ में सर्वोच्च बलिदान देने वाले जेसीओ राकेश कुमार का पार्थिव शरीर उनके हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी स्थित उनके पैतृक गांव के लिए पूरे सैन्य सम्मान के साथ भेज दिया गया। इससे पहले जम्मू एयरपोर्ट पर सेना की व्हाइट नाइट काॅर्प के अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। अधिकारियों ने कहा कि राकेश का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उनके इस बलिदान को सेना हमेशा याद रखेगी और भारतीय सेना इसकी ऋणी रहेगी।

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