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सुरक्षा एजेंसियों के साइबर तंत्र ने तोड़ी आतंकियों की कमर

Fri, 24 Jul 2015 02:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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आतंकी संगठन अपने साइबर नेटवर्क को मजबूत कर आतंक का कुनबा बढ़ाने की साजिश कर रहे हैं। जिस पर नजर रखने के लिए खुफिया एजेंसियों ने भी कमर कस ली है। आतंकियों की घुसपैठ पर नजर रखने वाली एजेंसियां अब आतंकियों के साइबर नेटवर्क पर नजर रखने के लिए अपने साइबर इंटेलिजेंस तंत्र को मजबूत करने की तैयारी कर रही हैं, ताकि आतंकियों के प्लान को विफल किया जाए।
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पिछले दिनों युवा आतंकियों ने अपनी ग्रुप फोटो सोशल साइट पर पोस्ट की थी। इससे आतंकी अपने साथ अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ना चाहते हैं। जानकारी के अनुसार पिछले एक साल से आतंकी संगठनों ने हमलों और गतिविधियों को चलाने में संचार और संपर्क में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है।

आतंकी हमला करने से पहले अपने आसपास के नेटवर्क को आधुनिक तकनीक के जैमरों से जाम कर देते हैं। आतंकियों की तरफ से लगातार ऐसा किया जा रहा है। राजोरी, पुंछ, शोपियां, कुपवाड़ा, बारामुला क्षेत्रों में आतंकी हमलों के दौरान एजेंसियों ने यह महसूस किया।
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वहीं घुसपैठ में नाकाम आतंकी संगठन अब अपने साथ युवा आतंकियों को जोड़ने के लिए अपने साइबर नेटवर्क को मजबूत कर रहे हैं। इसमें सोशल साइट फेसबुक, ट्विटर, यू ट्यूब और व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया जा रहा है। आतंकी संगठन अपनी गतिविधियों का यहां विस्तार कर रहे हैं।

इस पर भारतीय खुफिया एजेंसियां अपना तंत्र मजबूत कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को खुफिया एजेंसियों ने रिपोर्ट सौंप कर आतंकियों के साइबर नेटवर्क के जरिये अपनी गतिविधियां चलाने की जानकारी दी है। जिस पर अंकुश लगाने के लिए अपने नेटवर्क को मजबूत करने की बात कही गई है।

सूत्रों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में खुफिया एजेंसियों ने आतंकियों की घुसपैठ के अलावा अब आतंकियों के साइबर नेटवर्क पर भी नजर रखना शुरू कर दिया है।

कमजोर भारतीय नेटवर्क पर पाक नेटवर्क मजबूत
आतंकी संगठनों को सिर्फ सोशल साइट्स ही नहीं, बल्कि पाकिस्तानी मोबाइल नेटवर्क कंपनियों की भी पूरी मदद मिलती है। बार्डर और एलओसी पर भारतीय कंपनियों के कमजोर नेटवर्क का लाभ उठाकर पाकिस्तानी कंपनियां अपना नेटवर्क बढ़ा देती हैं।

जिसका आतंकी लाभ उठाते हैं और अपने नेटवर्क के जरिये आतंकियों के  संचार नेटवर्क को मजबूत करने में मदद करती हैं। इस पर अभी सुरक्षा एजेंसियां कुछ नहीं कर पाई हैं।
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