नवरात्र सामान्य तौर पर दो ऋतुओं का मिलन काल है। सर्दी और गर्मी की ऋतुएं जब मिलती हैं तो यह अवसर आता है। क्षितिज में जब सुबह और शाम दोनों मिलते हैं, सूर्य का उदय हो रहा हो या अस्त, उस संधि को संध्या का समय कहते हैं।
सभी धर्मों के अनुयायी सुबह शाम ईश्वर का स्मरण करते हैं। भारतीय धर्म पंरपरा में दोनों संध्याओं के मिलन की तरह दोनों ऋतुएं मिलती हैं, तब भी साधना उपासना का क्रम और विधान अपनाया जाता है। नवरात्र दो माने गए हैं।
छह-छह महीने के अंतर से बदलने वाली दो ऋतुओं के समय सर्द गर्म मौसम का मिजाज बदलता है और सूक्ष्मजगत में आध्यात्मिक तंरगों का प्रवाह भी नई दिशा और ऊर्जा की गति बदलती है।