फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कश्मीर: उपद्रवियों के निशाने पर फिर हो सकते हैं घाटी के स्कूल

Mon, 22 May 2017 08:52 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/श्रीनगर
विज्ञापन
कश्मीर घाटी में हिंसक प्रदर्शन - फोटो : File Photo
विज्ञापन
कश्मीर में स्कूलों को फिर से निशाना बनाया जा सकता है। आतंकी बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत के बाद उपद्रवियों ने 35 स्कूलों को आग के हवाले कर दिया था और 30 से अधिक स्कूल क्षतिग्रस्त किए गए थे। पचास से अधिक सरकारी भवनों को भी नुकसान पहुंचाया गया था।
विज्ञापन


सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि छात्र-छात्राओं की पत्थरबाजी को हवा देकर उपद्रवी तत्व फिर से स्कूलों, शिक्षण संस्थानों और सरकारी भवनों में आगजनी कर सकते हैं।सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पुलवामा डिग्री कालेज के प्राचार्य ने पुलिस को सूचना दी थी कि उपद्रवी तत्व कालेज को जला सकते हैं। इसी सूचना के बाद सुरक्षा बल और पुलिस की टीम कालेज पहुंची।

उपद्रवी तत्वों, आतंकी संगठनों और अलगाववादियों से जुड़े कुछ छात्रों ने इसके विरोध में जाम लगाकर पत्थरबाजी की और जवाबी कार्रवाई के बाद कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में कालेजों और स्कूलों के छात्र-छात्राओं को उकसाया गया। पुलिस की काउंसिलिंग के बाद भी अब लगभग एक दर्जन कालेजों में छात्रों के बीच उपद्रवी तत्व सक्रिय हैं। यही कारण है कि पत्थरबाजी का सिलसिला थम नहीं रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

पाकिस्तान में बैठे हैं अफवाहें फैलाने वाले सोशल मीडिया के संचालक

kashmir - फोटो : File Photo
गवर्नर एनएन वोहरा और शिक्षा मंत्री अल्ताफ बुखारी की बैठक के बाद रियासत सरकार ने गिरफ्तार छात्र पत्थरबाजों को रिहा किया। इसके बाद गवर्नर ने कुलपतियों के साथ बैठक कर कालेजों में शांति के लिए विस्तृत कार्ययोजना पर बातचीत की। कुलपतियों की सक्रियता के बाद कुछ कालेजों में पत्थरबाजी बंद हुई है, लेकिन कालेजों में पठन-पाठन अब भी प्रभावित है।

डीजीपी एसपी वैद ने कहा है कि कुछ तत्व हैं जो सक्रिय हैं। पुलिस ने छात्रों से अपील की है कि वे अपनी मांगें प्राचार्य के माध्यम से रखें। कालेज प्रशासन उसे शिक्षा मंत्री और प्रशासन के पास रखेगा। अभिभावकों के द्वारा छात्रों की काउंसिलिंग भी की जा रही है। 
पाकिस्तान में आतंकी हाफिज सईद पर सख्ती का कश्मीर पर कोई असर नहीं दिख रहा है। जमात-उद दावा और लश्कर-ए-तैयबा ने इस साल को कश्मीर वर्ष के रूप में घोषित कर रखा है। इसके तहत हिंसा और आतंकी हमले की साजिश रची जा रही है।

हिजबुल के ओवरग्राउंड वर्कर्स कालेजों में भी पहुंच गए हैं। आतंकी संगठन युवकों और छात्रों को भड़का रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि कश्मीर में अफवाहें फैलाकर छात्रों को भड़काने वाले सोशल मीडिया के संचालक पाकिस्तान में बैठे हैं। पाकिस्तान की शह पर सोशल मीडिया के दुरुपयोग से हालात को बिगाड़ने की कोशिश हो रही है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें