महाराजा के समय में 1885 में किया गया था निर्माण 15 साल तक रही पाठशाला, 1958 में बनाया गया प्राइमरी स्कूल
सांबा। घगवाल के तहत आते गांव रतनपुर सुराड़ा में महाराजा के समय से बने स्कूल का दर्जा नहीं बढ़ाने से लोगों में रोष है। स्थानीय पूर्व सरपंच सत पाल सिंह, पूर्ण चंद, गोपाल दास और गणेश दास ने बताया कि रतनपुर सुराड़ा गांव का स्कूल महाराजा के समय में 1885 में बनाया गया था। उस समय यह पाठशाला होती थी, यह 15 साल तक सुराड़ा में रही। बाद में छह माह के लिए गौरण, छह माह बदोली में खुला।
इसके बाद बुजुर्गों ने जगह दी और घर के निकट ही एक कमरा बनाया, जहां स्कूल चलता रहा। 1958 में प्राइमरी स्कूल बनाया गया। 1963 में दर्जा बढ़ाकर आठवीं कक्षा तक हुआ। आसपास के गावों के बच्चे इसी स्कूल में शिक्षा ग्रहण करते रहे। 2012 में स्कूल का दर्जा बढ़ा और हाई स्कूल बनाया गया। इसके बाद उपायुक्त से लेकर उप राज्यपाल तक को दर्जनों ज्ञापन सौंपे, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
स्थानीय लोगों के अनुसार आयुक्त सचिव के पास उनके स्कूल की फाइल पहुंच चुकी है। 2018 में एक सर्वे में सुराड़ा स्कूल का दर्जा बढ़ाने की सिफारिश की गई थी। मगर आज तक समाधान नहीं किया गया है। इसके बदले निचला में बने हाई स्कूल का दर्जा बढ़ाने की सिफारिश की जा रही है। गत दिनों नेकां के पूर्व मंत्री अजय सढ़ोत्रा को मांगपत्र दिया था। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि स्कूल का दर्जा बढ़ाने को लेकर व मुख्यमंत्री से बात करेंगे।
कोट
रतनपुर सुराड़ा के हाई स्कूल व निचला के हाई स्कूल के लिए दर्जा बढ़ाने की मांग उनके पास आई थी। दोनों स्कूलों की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी है, जिसे सरकार को भेजा जाएगा। दर्जा बढ़ाना सरकार का काम है।
केवल कृष्ण, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी सांबा