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आतंकवाद लोगों के दिमाग में, राज्यपाल बोले- 6 महीने में बातचीत लायक माहौल तैयार करने की कोशिश

Tue, 06 Nov 2018 09:29 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि राज्य प्रशासन सभी पक्षों से बातचीत के लिए माहौल तैयार करने में जुटा है। उम्मीद है कि अगले चार से छह महीने में इसके लिए अनुकूल माहौल तैयार हो सकता है। आतंकवाद बंदूक में नहीं बल्कि लोगों के दिमाग में है। इसे बदलने की कोशिश हो रही है। हिंसा से किसी भी समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि बातचीत से ही रास्ता निकलेगा। 

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जम्मू में छह महीने के लिए सरकार का दरबार सजने के बाद सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि, बातचीत के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आदेश प्राप्त है। इसके साथ ही लोगों तक पहुंचने, उनके लिए उपलब्ध रहने, उनकी समस्याओं का समाधान करने व राज्य का विकास सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। अगर हमें चार से छह महीने का समय दिया जाए तो हम ऐसा माहौल बनाने का प्रयास करेंगे जिसमें बातचीत की जा सके। 

उन्होंने कहा कि राज्य में पथराव और आतंकवाद संबंधी घटनाओं में कमी आई है। पिछले दो महीने में एक भी युवा आतंकी संगठनों में भर्ती नहीं हुआ है। एक के शामिल होने की बात सामने आ रही है, लेकिन अभी वह पुष्ट नहीं है। पत्थरबाजी की छिटपुट घटनाएं हुईं हैं। निकाय चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हुए। किसी चिड़ियां तक को खरोच नहीं पहुंची। सरकारी नीतियों के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं।

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रोहिंग्याओं का बायोमीट्रिक ब्योरा दो महीने में

दो क्षेत्रीय राजनीतिक दलों नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी को निकाय चुनाव में शामिल कराने में उनके विफल रहने संबंधी सवाल के जवाब में कहा कि उन्हें अपनी भूल का अहसास है। उम्मीद है वे पंचायत चुनाव में हिस्सा लेंगे। एक सीट के लिए तीन-तीन प्रत्याशी मैदान में हैं। कहा कि अनुच्छेद 35-ए निकाय चुनाव में कोई मुद्दा नहीं था। यदि यही मुद्दा था तो दोनों दलों ने कारगिल का चुनाव क्यों लड़ा। 

जम्मू क्षेत्र में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों के बायोमीट्रिक ब्योरे अगले दो माह में एकत्र कर लिए जाएंगे। इसके लिए राज्य प्रशासन को हिदायत दे दी गई है। ब्योरा एकत्र होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। 

जम्मू के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हूं : सत्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि वे जम्मू के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। साथ ही यहां की समस्याओं की भी जानकारी है। बोले कि वह और आरिफ मोहम्मद खान इमरजेंसी के समय अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों में ही रहते थे। आईबी के सभी गांवों की समस्याओं की जानकारी है। पहला दौरा इन्हीं इलाकों का होगा और लोगों की समस्याओं का समाधान होगा। 
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