संदीप की आखिरी बार गुरदासपुर में रहने वाली बहन से फोन पर बात हुई थी। उसने उसके पास आने की बात कही थी। संदीप के पिता नंदकिशोर शर्मा ने बताया कि बेटे के घर आने-जाने का कोई तय समय नहीं था। वह कभी दिन में तो कभी देर रात पहुंचता था। कई-कई दिन तक उससे किसी की बात नहीं होती थी। इसी वजह से यह भी पता नहीं चल सका कि वह कमरे में मृत पड़ा है।
तीन दिन तक कमरे में पड़े रहने से शव इतना फूल चुका था कि पहली नजर में उसकी पहचान भी नहीं हो सकी। हाथ में पहने कड़े से यकीन हुआ कि शव संदीप का है। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव हमें सौंप दिया। इसके बाद अंतिम संस्कार किया गया।
संदीप की बहन ने बताया कि कुछ दिन पहले भाई का फोन आया था। बातचीत सामान्य थी और उसने गुरदासपुर आने की बात कही थी। इसके बाद उसका मोबाइल बंद आने लगा। भाई की मौत की सूचना पर जम्मू पहुंची हूं।