तीन सीमावर्ती ब्लाॅकों के ग्रामीणों के लिए 3492 नए बंकर बनाने को अब तक नहीं मिली अनुमति
सांबा। सीमा पर बने तनाव के बीच लोगों को बंकरों की कमी खल रही है। जिले की भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट बसे गांवों के कई ग्रामीण आज भी बंकरों से वंचित हैं।
कई गावों के मोहल्लों में बंकर नहीं बनाए गए तो कई छूट गए कई लोगों के पास भूमि नहीं थी इस कारण उनके बंकर नहीं बने। स्थानीय निवासी राम लाल, प्रेम पाल, रछपाल सिंह, मुन्ना राम और रिंकू ने कहा कि उनके मोहल्लों में आज भी बंकर नहीं हैं। उन्होंने अपनी मांग को जिला प्रशासन के साथ एलजी तक उठाया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जम्मू दौरे के दौरान उन्हें अवगत करवाया तो उन्होंने जम्मू-कश्मीर सरकार को निर्देश जारी किए कि जिन लोगों को बंकरों की सहूलियत नहीं है उनके लिए नए बंकर बनाए जाएं। इस पर प्रशासन ने सर्वे भी किया लेकिन अभी तक बंकरों का निर्माण नहीं करवाया गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार दिल्ली विस्फोट के बाद दोनों देशों की सीमाओं पर तनाव की स्थिति है। ऐसे में यदि जंग के हालात बनते हैं तो उनका क्या होगा, वह लोग परिवारों की सुरक्षा कैसे करेंगे। ग्रामीणों के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह लोग अन्य ग्रामीणों के बंकरों में छिपे थे। यदि ऑपरेशन सिंदूर दो शुरू होता है, तो उन्हें काफी परेशानी बनेगी।
जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार जिले के तीन सीमावर्ती ब्लाॅकों के ग्रामीणों के लिए 3492 बंकरों का सर्वे किया गया है। इसमें सांबा क्षेत्र 507 निजी और 55 कम्युनिटी बंकर, एसडीएम घगवाल के अधिकार क्षेत्र में 1965 निजी, 52 कम्युनिटी, एसडीएम विजयपुर के अधिकार क्षेत्र में 873 निजी और 53 कम्युनिटी बंकर शामिल हैं। इनमें 3332 निजी और 160 कम्युनिटी बंकर बनाए जाने हैं जिन्हें प्रशासन के उच्च अधिकारियों के पास अनुमति के लिए भेजा गया है। अब तक अनुमति ही नहीं मिली है।
कोट
हमने सीमावर्ती क्षेत्र के बंकरों का सर्वे कर जिला प्रशासन को सौंप दिया है। वहां से डिवकॉम कार्यालय भेज दिया गया है। अनुमति मिलते ही काम शुरू करवाया जाएगा।
केएस बाली, एसडीएम घगवाल