जांच में खामियां उजागर, मेडिकल व जांच अधिकारी की गवाही न आने से कमजोर पड़ा मामला
सांबा। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सांबा की अदालत ने घगवाल थाना क्षेत्र में वर्ष 2015 में दर्ज मारपीट और घर में घुसपैठ के मामले में दो आरोपियों प्रकाश चंद और उनकी पत्नी पोली देवी को बरी कर दिया। अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा और प्रस्तुत साक्ष्यों का कोई विश्वसनीय आधार नहीं मिला।
शिकायतकर्ता बंसी लाल ने 4 दिसंबर 2015 को पुलिस में रिपोर्ट दी थी कि 3 दिसंबर की शाम आरोपी दंपती और उनका बेटा घर में घुस आए और मारपीट की। इसी शिकायत पर पुलिस ने आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। फैसले में अदालत ने साफ कहा कि अभियोजन की ओर से गंभीर लापरवाही सामने आई है। चोटों की जांच करने वाले मेडिकल ऑफिसर को अदालत में पेश नहीं किया गया। जांच अधिकारी की गवाही भी रिकॉर्ड नहीं कराई गई। इससे जांच से जुड़े अहम सवालों का जवाब नहीं मिल सका। मेडिकल रिपोर्ट को अदालत में साबित नहीं किया जा सका।
गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते थे और कई महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आए। अदालत ने कहा कि ऐसे हालात में अभियोजन का केस संदेह पर साबित नहीं होता। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्य पूरी तरह असंतोषजनक हैं और इनमें विश्वसनीयता की कमी है। ऐसे में किसी भी आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने दोनों आरोपी प्रकाश चंद और पोली देवी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है।