कांग्रेस के दो दिग्गजों गुलाम नबी आजाद और प्रो. सैफुद्दीन सोज का राजनीतिक कैरियर दांव पर है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता आजाद और पार्टी की जम्मू-कश्मीर इकाई के मुखिया प्रो. सोज का राज्यसभा का मौजूदा कार्यकाल अगले महीने पूरा हो रहा है।
रियासत के ताजा राजनीतिक हालात में बिना किसी करिश्मे के इनका दोबारा राज्यसभा के लिए चुना जाना मुश्किल दिखता है। पार्टी हाईकमान इन दिग्गजों के कैरियर को लेकर पशोपेश में है।
लिहाजा, पार्टी फोरम पर इनके बेहतर एडजस्टमेंट की कोशिशें चल रही हैं। राज्य से राज्यसभा की चार सीटों के लिए सात फरवरी को चुनाव होने हैं।
87 सदस्यीय विधानसभा होने के नाते राज्यसभा की प्रत्येक सीट के लिए 21 से ज्यादा विधायकों का समर्थन होना चाहिए।
नेकां-कांग्रेस को एक सीट भी नहीं मिलेगी
त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में पीडीपी और भाजपा के पास एक-एक सीटें जीतने की क्षमता है। नेशनल कांफ्रेंस तथा कांग्रेस के पास क्रमश: 15 और 12 सीटें हैं। इस लिहाज से ये दोनों दल एक भी सीट पाने की स्थिति में नहीं हैं। पिछले चुनाव में इन दोनों पार्टियों ने गठजोड़ कर राज्यसभा की दो-दो सीटों पर कब्जा कर लिया था।
कांग्रेस कोटे से आजाद और सोज को पार्टी ने राज्यसभा भेजा था। लेकिन इस बार समीकरण बिल्कुल उल्टा है। उधर, सूत्रों का कहना है कि पीडीपी और भाजपा आपसी गठबंधन कर दो-दो सीटें अपने पाले में करने की रणनीति पर काम कर रही है। दोनों दल नेकां-कांग्रेस के इतिहास की पुनरावृत्ति कर सकते हैं।
पीडीपी प्रवक्ता नईम अख्तर मानते हैं कि राज्यसभा की सीटें पार्टी के लिए काफी अहम हैं। इसके लिए पार्टी रणनीति बना रही है। जल्द ही इसकी घोषणा कर दी जाएगी।
हाथ पैर नहीं मार रही कांग्रेस
नेकां के सूत्रों का कहना है कि संख्या बल को देखते हुए पार्टी राज्यसभा के लिए इच्छुक नहीं है। नेकां के एक राज्यसभा सदस्य उरी मौजूदा विधानसभा में विधायक चुन लिए गए हैं। कांग्रेस विधानसभा में अपनी हैसियत को परखते हुए बहुत हाथ पैर नहीं मार रही है। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा के लिए तैयारियां की जा रही हैं।
पार्टी प्रमुख प्रो. सैफुद्दीन सोज का कहना है कि पार्टी तय समय पर अपनी रणनीति का खुलासा करेगी। इसके लिए वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श चल रहा है। सबसे अधिक गुलाम नबी आजाद फंसे नजर आ रहे हैं।
कारण राज्यसभा की सदस्यता खत्म होने के बाद उनके पास कोई पद नहीं रह जाएगा। ऐसे में अपने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तथा पूर्व मुख्यमंत्री के बेहतर एडजस्टमेंट के लिए पार्टी हाईकमान स्तर पर कोशिशें चल रही हैं। रियासत में सोज के खिलाफ बगावत को भी आजाद से जोड़कर देखा जा रहा है।
आजाद की नजर प्रदेश अध्यक्ष पद पर
कहा जा रहा है कि आजाद की नजर प्रदेश अध्यक्ष पद पर है। इसलिए इनके गुट के लोगों ने ही हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए सोज से पद से हटने की मांग की थी। हालांकि, आजाद ने बगावत के बाद इस प्रकार की अनुशासनहीनता पर गहरी नाराजगी जताई थी और कार्यकर्ताओं को अनुशासन की सीमा में रखने की हिदायत दी थी।
मुफ्ती ने कार्यकर्ताओं से की गुफ्तगू
पीडीपी संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद वीरवार की रात ही यहां पहुंच गए। शुक्रवार को पूरे दिन वे अंबफला स्थित आवास बंगला नंबर चार में ही रहे। यहां उनसे मिलने पार्टी नेता तथा कार्यकर्ता पहुंचे।
समझा जाता है कि ताजा राजनीतिक हालात के विषय में उन्होंने कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श किया। पार्टी अध्यक्ष और सांसद महबूबा मुफ्ती इन दिनों कश्मीर में ही हैं।
कहा जा रहा है कि वे भी अगले कुछ दिनों में यहां आ सकती हैं। इसके बाद सियासी सरगर्मी और तेज होगी।