श्रीनगर। वर्ष 2024 में केसर के लिए निराशाजनक रहने वाले मौसम के बाद बारिश की कमी के कारण उत्पादन में भारी गिरावट आई थी लेकिन इस साल कश्मीर के केसर उत्पादकों को एक बार फिर अच्छी पैदावार की उम्मीद है। सितंबर में फसल के विकास के महत्वपूर्ण चरण के दौरान हुई पर्याप्त बारिश ने पाम्पोर और आसपास के केसर उत्पादक क्षेत्रों में बेहतर फसल की उम्मीदें जगाई हैं। 20 अक्तूबर के आसपास इसकी कटाई शुरू होने की उम्मीद है।
इलाके के किसानों का कहना है कि फसल में सुधार के स्पष्ट संकेत दिख रहे हैं। कंद स्वस्थ हैं और मिट्टी में नमी बनी हुई है। कश्मीर केसर उत्पादक संघ के अध्यक्ष अब्दुल मजीद वानी ने कहा कि पिछला साल विनाशकारी था। फूल मुश्किल से खिले थे। इस बार का मौसम आशाजनक लग रहा है। अगर हमें एक और बारिश मिली तो उपज 80 प्रतिशत तक पहुंच सकती है जो हमारे लिए वरदान होगा।
कश्मीर के केसर नगर के नाम से मशहूर पाम्पोर के किसान भी इसी तरह की आशा व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस साल पौधे अधिक स्वस्थ दिख रहे हैं और फूलों के अधिक मजबूत होने की संभावना है। एक स्थानीय किसान बशीर अहमद ने कहा अगर उत्पादन 70-80 प्रतिशत तक भी पहुंच जाता है तो भी कई खराब मौसमों के बाद हमें कुछ राहत मिलेगी। इस बार मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिले लेकिन जिस दौरान फसल को पानी की सबसे अधिक जरूरत थी उस दौरान अच्छी बारिश हुई जिससे गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।
हालांकि, इस आशावाद के साथ-साथ कुछ चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। कश्मीर में केसर की खेती का रकबा लगातार सिमट रहा है। किसान जलवायु परिवर्तन, अपर्याप्त सिंचाई और सबसे चिंताजनक रूप से केसर के कंदों की तस्करी जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं जो इस फसल की नींव हैं। पहले लगभग 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में केसर की खेती होती थी लेकिन अब यह घटकर लगभग 3,000 हेक्टेयर रह गई है। इसके अलावा केसर के कंदों की तस्करी एक गंभीर मुद्दा बनी हुई है। महज दो महीने पहले अवंतीपोरा में पुलिस और कृषि अधिकारियों ने घाटी से बाहर 1.5 क्विंटल केसर के कंदों की तस्करी के एक बड़े प्रयास को विफल कर दिया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं रोपण के मौसम में कमी लाकर स्थानीय खेती को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। एक किसान नसीर अहमद ने कहा, केसर सिर्फ एक आर्थिक फसल नहीं है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। अगर कंदों की तस्करी इसी तरह जारी रही तो हमारी यह विरासत खतरे में पड़ जाएगी। बता दें कि शुद्ध कश्मीरी केसर की कीमत 2-3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है। एक हेक्टेयर से लगभग 2 से 5 किलोग्राम केसर प्राप्त होती है, जिससे 4 से 15 लाख रुपये तक की आय हो सकती है।
गौरतलब है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में उत्पादन 17.33 मीट्रिक टन से घटकर 2022 में 14.87 मीट्रिक टन रह गया। 2023 में मामूली सुधार के साथ यह 14.94 मीट्रिक टन हुआ जबकि 2024 में उत्पादन सामान्य स्तर का केवल 30 प्रतिशत ही रहा। हालांकि राष्ट्रीय केसर मिशन के तहत की गई पहलों ने कुछ खेतों को पुनर्जीवित करने में मदद की है, लेकिन विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि जब कंदों को अवैध रूप से चुराया जाता है तो ये लाभ कम हो जाते हैं। उत्पादकों ने सिंचाई सुविधाएं बहाल करने और इस परियोजना के पुनरुद्धार के लिए ठोस कदम उठाने के लिए सरकार के हस्तक्षेप की मांग भी की है।