अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद 62 साल बाद पंजाब से आए सफाई कर्मचारियों को अधिकार मिला है। 1957 में पंजाब से सफाई कर्मचारियों को जम्मू कश्मीर लाया गया था। इस दौरान इनकी तैनाती अलग-अलग नगर निगम में हुई थी। सफाई कर्मचारी सेवारत पद से ही सेवानिवृत्त हो गए।
इनके बच्चे भी बतौर सफाई कर्मचारी सेवाएं देते रहे हैं। जो बच्चे पढ़ लिखकर नौकरी की चाह रख रहे थे। स्टेट सब्जेक्ट के कारण इन्हें नौकरी नहीं मिल पा रही थी। मजबूरन बच्चों को पैतृक व्यवसाय करना पड़ रहा था। अब सफाई कर्मचारियों के बच्चे भी राज्य में अलग-अलग विभागों में भरे जाने वाले पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। साथ ही प्रशासनिक सेवाओं में भी भाग ले सकेंगे।
इस फैसले के बाद सफाई कर्मचारी आंदोलन यूनियन ने जश्न मनाया और मिठाइयां बांटी। इस मौके पर सफाई कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। वहीं, सिविक सफाई कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष रिंकू गिल ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि फैसले से सफाई कर्मचारियों को उनका हक मिला है। लंबे समय से मांग की जा रही थी। अब सफाई कर्मचारियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। उधर, सफाई कर्मचारी आंदोलन यूनियन के अध्यक्ष सन्नी खोखर ने कहा कि केंद्र सरकार का फैसला सराहनीय है। इससे अब पंजाब से आए सफाई कर्मचारियों के बच्चे भी आगे बढ़ सकेंगे।