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मलबे में दबे सभी लोगों को मृत घोषित करेगा प्रशासन

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सितंबर महीने में हुए भूस्खलन के कारण मलबे में दबे ग्यारह लोगों को प्रशासन मृत घोषित करेगा। अभी तक तलाशी अभियान में मलबे से 29 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। मोंगरी के तहसीलदार और कार्यकारी मजिस्ट्रेट (फर्स्ट क्लास) द्वारा जारी नोटिफिकेशन के तहत 6 सितंबर 2014 को पंजर मोहरा सद्दल गांव में भारी भूस्खलन हुआ था। इस भूस्खलन के कारण 40 लोग मलबे में दब गए थे।
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प्रशासन ने जेसीबी लगाकर तुरंत कार्रवाई की और मलबे में दबे शवों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। इस दौरान जिन लोगों के शव मलबे में दबे, उनके करीबियों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई।

पुलिस ने मामले की जांच की और इसकी रिपोर्ट तहसीलदार कार्यालय को सौंपी, जिसमें बताया गया 6 सितंबर को हुए भूस्खलन के दौरान ग्यारह लोग अपने घरों में ही मौजूद थे। पूरी संभावना है कि सभी मलबे में ही दबे हैं। अब उनकी तलाश नहीं हो सकती है।
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अब किसी का शव निकालना संभव नहीं

संभावना है कि सभी लोगों की मौत हो चुकी है। तहसीलदार राइस सेम्युल के अनुसार इन ग्यारह लोगों को मृत घोषित किया जा रहा है। अगर किसी को कोई आपत्ति है तो वह 30 दिन के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। इस 11 लोगों में चार बच्चे भी शामिल हैं।

गिरिधारी लाल की पत्नी लीला देवी, बेटी शारदा देवी, बेटा दीपक कुमार, शंभू नाथ का बेटा दिलीप सिंह, मंगू राम का बेटा सोंकू राम, सोंकू राम का बेटा मदन लाल, कपूर सिंह की पत्नी सीता देवी, मंगू का बेटा नंद लाल, कैलाश कुमार की पत्नी सुषमा देवी, दो बेटे नमन कुमार और प्रदीप कुमार शामिल हैं।

सभी पंजर, मोहरा, सद्दल और लड़डा गांव के निवासी हैं। प्रशासन ने पिछले सप्ताह ही शवों की तलाश का काम बंद कर दिया था। चुनावों के कारण व्यस्तता के बाद प्रशासन ने पाया अब इन मृतकों को तलाश करना असंभव है और अब मृत घोषित करने का अध्यादेश जारी किया है।
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