ग्रामीणों को अक्षरों का ज्ञान देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की योजना साक्षर भारत मिशन आज तक जम्मू संभाग में पूरी तरह से लागू नहीं हो सका है। मिशन को लेकर चार वर्ष से शिक्षा विभाग बैठकों का ही काम कर रहा है। अभी तक साक्षर भारत मिशन केवल कागजों तक ही सीमित है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चुनाव संपन्न होने के बाद इसको लेकर काम शुरू कर दिया जाएगा।
दूरदराज ग्रामीण इलाकों में आज भी हजारों ग्रामीणों को अक्षरों का ज्ञान नहीं है। इसी कारण ग्रामीण न तो सरकारी योजनाओं का सही तरह से लाभ ले पाते हैं और अकसर ठगी का शिकार होते हैं। इसी को लेकर 2010 में जम्मू संभाग में साक्षर भारत मिशन को मंजूरी मिली थी।
मिशन के तहत शिक्षा विभाग ने सबसे पहले सर्वे करके रिपोर्ट तैयार करनी थी, जिसमें अनपढ़ ग्रामीणों की सूची तैयार करनी थी। इसमें बच्चों से लेकर 55 वर्ष तक बुजुर्ग रखे जाने थे। इसके बाद ग्रामीण स्तर पर शिक्षित लोगों की कमेटियां तैयार करनी थीं। कमेटियों ने प्रेरक नियुक्त करने थे।
प्रेरक वे होंगे, जो कि ग्रामीणों को बुनियादी शिक्षा प्रदान करेंगे। प्रेरक गांव के शिक्षित युवाओं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बनाया जाना है। डाइट प्रिंसिपल को साक्षर भारत मिशन का सेक्रेटरी नियुक्त किया गया है। प्रेरकों की जिम्मेदारी है कि यह ग्रामीणों को अक्षरों का ज्ञान देंगे।
कई ऐसे जिले हैं, जहां पर अभी तक शिक्षा विभाग ने साक्षर मिशन का सर्वे भी नहीं करवाया है। जहां सर्वे हुए हैं, वहां ग्रामीणों की कमेटियां नहीं बनाई जा सकी हैं। चार वर्ष में कई बार शिक्षा विभाग और जिला प्रशासनों ने इसको लेकर बैठकें की हैं, लेकिन अभी तक जमीनी स्तर पर इस पर काम नहीं किया गया है। वहीं ग्रामीण लगातार इसके लागू होने का इंतजार कर रहे हैं।
डायरेक्टर स्कूल एजूकेशन जम्मू आरए इंकलाबी का कहना है कि कई जिलों में सर्वे पूरे करके प्रेरक नियुक्त किए जा चुके हैं। अंतिम चरण का काम किया जाना बाकी ही था कि सितंबर माह में बाढ़ ने तैयारियों पर पानी फेर दिया। फिल्हाल सभी शिक्षा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी चुनाव की तैयारियों में व्यस्त हैं। चुनाव के बाद जल्द इस काम को शुरू कर दिया जाएगा।