पाक की गोलाबारी पर मंगलवार को भी विधानसभा और विधान परिषद में हंगामा हुआ। विधानसभा में भाजपा ने पाक विरोधी नारे लगाए। साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास करने की मांग उठाई। विपक्ष ने सरकार पर हालात की अनदेखी का आरोप लगाते हुए सदन का बहिष्कार किया।
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही नेकां तथा कांग्रेस के सदस्यों ने सरकार विरोधी नारेबाजी शुरू करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सदस्यों का कहना था कि पाकिस्तानी गोलाबारी से लोगों की सुरक्षा करने में सरकार विफल रही है। इस वजह से 12 लोगों की जान चली गई जिसमें सात नागरिक थे।
शोर शराबे के बीच नेकां के अली मोहम्मद सागर ने आरोप लगाया कि इतने लोगों के मारे जाने के बाद भी सरकार चुप बैठी हुई है। सरकार को सदन में जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा सांसद ने हाल ही में दावा किया कि केंद्र सरकार ने बंकरों के निर्माण के लिए 400 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए हैं तो मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उन्हें बंकरों की जरूरत नहीं है बल्कि भारत-पाक के बीच संबंधों में सुधार की जरूरत है ताकि सीजफायर उल्लंघन की घटनाएं रुक सकें।
गठबंधन के सहयोगी दलों के विचारों में मतभेद है। इस वजह से सरकार को अपना स्टैंड साफ करना चाहिए। नेकां के ही मियां अल्ताफ ने कहा कि सरकार को बार्डर के हालात पर प्रस्ताव पारित करना चाहिए। कांग्रेस के नवांग रिगजिन जोरा ने आरोप लगाया कि सरकार बेबस होकर लोगों की मौत तथा संपत्तियों के नुकसान का तमाशा देख रही है। सरकार को सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।
भारत पाक शुरू करें सुलह की प्रक्रिया: वीरी
सीमापार से होता बमबारी
विपक्ष के सरकार विरोधी नारे लगाने के दौरान भाजपा सदस्य भी आक्रामक मुद्रा में आ गए। उन्होंने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। भाजपा विधायक सत शर्मा, रवींद्र रैणा, राजेश गुप्ता, राजीव जसरोटिया, आरएस पठानिया ने विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी का लगातार विरोध किया। इस बीच सत शर्मा ने पाक की गोलाबारी के लिए सदन से पाकिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किए जाने का मामला उठाया।
सदन में लगातार हंगामे को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री अब्दुल रहमान वीरी ने सदस्यों से शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन वे हंगामा करते रहे। फिर विपक्ष के नेता उमर अब्दुल्ला सहित अन्य सदस्यों ने वाकआउट कर दिया।
विधान परिषद में मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सभी दलों के सदस्यों ने खड़े होकर बार्डर फायरिंग पर हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के सदस्यों ने सरकार से इस मामले में सदन में जवाब देने की मांग की।
कांग्रेस के गुलाम नबी मोंगा, नरेश कुमार शर्मा, ठाकुर बलवीर सिंह के अलावा नेशनल कांफ्रेंस के सज्जाद अहमद किचलू, कैसर जमशेद लोन ने बार्डर फायरिंग का मसला उठाते हुए कहा कि सीमा के करीब रहने वाले लोग मर रहे हैं। लेकिन सरकार चुपचाप बैठी हुई है। इस मामले में भाजपा सदस्यों से उनकी बहस भी हुई। पीडीपी की तरफ से सुरेंद्र कुमार चौधरी ने भी सीमा पर गोलाबारी से लोगों को हो रही परेशानियों को दर्शाया।
विधान परिषद में बार्डर फायरिंग पर हंगामे के बाद संसदीय मामलों के मंत्री अब्दुल रहमान वीरी ने सरकार की तरफ से जवाब देते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि भारत और पाक सुलह की प्रक्रिया शुरू करें। सुलह से ही बार्डर फायरिंग रुकेगी और अन्य मसलों का हल भी होगा। जहां तक गोलाबारी से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और उन्हें मुआवजा देने का सवाल है तो केंद्र के अलावा राज्य सरकार प्रभावित लोगों को हर मुमकिन सहायता उपलब्ध करवा रही है।