आईआईटी से मैटेरियल साइंस एंड मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में एमटेक करने वाली जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले की रूबिया हसन ने अलगाववादियों को आइना दिखाया है। सामाजिक बंधन को तोड़कर पढ़ाई की और अब विदेश से पीएचडी करने का इरादा है। बेस्ट परफारमेंस के बाद भी रूबिया ने जॉब ऑफ स्वीकार नहीं किया।
आईआईटी के दीक्षांत समारोह मेें सोमवार को रूबिया हसन को केडेंस गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया। यह सर्वश्रेष्ठ खिताब होता है। एनआईटी श्रीनगर से बीटेक (88 फीसदी) करने वाली रूबिया कहती हैं कि घाटी की लड़कियां बुद्धिमान हैं, फिर भी सामाजिक भेदभाव पढ़ाई में बाधा डाल रही है। पढ़ने की आजादी नहीं है।
हमारा परिवार (पिता गुलाम हसन बट (रिटायर टीचर), मां जोहेरा बानो, चार भाई और दो बहन) पढ़ा-लिखा है, इसलिए सामाजिक भेदभाव आड़े नहीं आया। घर से बाहर निकलकर उच्च शिक्षा की पढ़ाई पूरी की है। विवाद को लेकर पिछले दिनों चर्चा में आए एनआईटी श्रीनगर के मुद्दे पर रूबिया ने कहा कि इसमें कुछ नया नहीं है।
भारत-पाकिस्तान के बीच जब भी क्रिकेट मैच होता है, विवाद होता ही है। इस बार इसे तूल दे दिया गया। रूबिया ने राजनीति से संबंधित सवालों का जवाब नहीं दिया, लेकिन इतना जरूर कहा कि घाटी के लोगों का दर्द समझने में सब नाकाम हैं। इसी का नतीजा है कि अशिक्षा और बेरोजगारी बढ़ी है।