फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jammu News: कश्मीर विवि में छात्र संघ पर कोई आधिकारिक रोक नहीं, बस 15 साल पुराना मौखिक निर्देश

विज्ञापन
विज्ञापन
आरटीआई में खुलासा - जम्मू-कश्मीर छात्र संघ के राष्ट्रीय समन्वयक ने मांगी थी जानकारी
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार ने कश्मीर क्षेत्र में छात्र राजनीति, संघों या संगठनों पर किसी भी प्रकार का आधिकारिक प्रतिबंध नहीं लगाया है, जैसा कि एक आरटीआई से सामने आया है। इससे पहले जम्मू क्षेत्र में भी छात्र राजनीति पर कोई प्रतिबंध नहीं होने की पुष्टि की गई थी। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि ऐसी कोई आधिकारिक सूचना या आदेश जारी नहीं किया गया है, जो इस तरह की कोई पाबंदी लगाए।
यह आरटीआई जम्मू-कश्मीर छात्र संघ के राष्ट्रीय समन्वयक नासिर खुहामी ने दायर की थी, जिन्होंने प्रदेश के विश्वविद्यालयों और शैक्षिक संस्थानों में छात्र सक्रियता व संघों पर प्रतिबंध लगाने के लिए आधिकारिक आदेश की फोटोकॉपी की मांग की थी। इसका जवाब देते हुए उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि छात्र संघों पर कोई रोक नहीं है। न ही उनकी स्थापना व कार्यप्रणाली पर कोई आधिकारिक सर्कुलर या निर्देश जारी किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

खुहामी ने कहा कि यह आरटीआई यह जानने के लिए दायर की थी कि क्या कश्मीर विश्वविद्यालय में छात्र संघों या राजनीति पर कोई आधिकारिक आदेश है। जम्मू विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू, सरकारी महिला कॉलेज गांधीनगर, केंद्रीय विश्वविद्यालय कश्मीर, इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और अन्य शैक्षिक संस्थानों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया में यह पुष्टि की कि छात्र राजनीति पर कोई आधिकारिक आदेश नहीं जारी किया गया है। हालांकि, कश्मीर विश्वविद्यालय के आरटीआई उत्तर में यह कहा गया कि विश्वविद्यालय में छात्र संघ की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि पहले से एक पारदर्शी प्रणाली मौजूद है। कश्मीर विवि ने कहा कि उसने छात्र संघों पर कोई लिखित या आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन विवि के प्रॉक्टर ने यह उल्लेख किया कि छात्र संघों पर 2009 में तत्कालीन वीसी प्रो. रियाज पंजाबी ने मौखिक रूप से प्रतिबंध लगाया था। खुहामी ने इस पर प्रतिक्रिया दी कि विश्वविद्यालय पारदर्शी शिकायत तंत्र के जवाब के साथ छात्रों को गुमराह कर सकता है। विश्वविद्यालय ने छात्र संघों की अनुपस्थिति को पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली से जस्टिफाई करने की कोशिश की, लेकिन सवाल यह उठता है कि किसने विश्वविद्यालय को पारदर्शी होने की मान्यता दी?
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें