कश्मीर घाटी में कौसर नाग यात्रा को अनुमति नहीं दिए जाने का विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक जा पहुंचा है। उधर, यात्रा को लेकर कश्मीर घाटी में इसका विरोध जारी रहा।
गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पांच थाना क्षेत्रों में धारा 144 लागू कर दी है। वहीं संवेदनशील इलाकों में अतरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं।
मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है और भाजपा ने सरकार पर अलगाववादियों के दबाव में आकर धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने को लेकर कड़ा विरोध जताया है।
उधर, राजधानी दिल्ली में पीएमओ में राज्यमंत्री और उधमपुर लोकसभा संसदीय क्षेत्र से सांसद डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने उनसे मिलने गए कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि वे उनकी ओर से सौंपे गए ज्ञापन को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को सौंपेंगे।
प्रदेश भाजपा ने इस मामले में आज इस मामले में अहम घोषणा करने की बात कही है।
नमाज के बाद घाटी में बवाल
घाटी में अलगाववादियों की अपील पर जुमे की नमाज के बाद पूरे कश्मीर में यात्रा के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारी हिंसात्मक हो उठे और उन्होंने सुरक्षा बलों पर पथराव भी किया।
प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले भी दागे। पुलिस ने घाटी के लगभग सभी अलगाववादियों को नजरबंद कर दिया, ताकि हालातों को काबू में रखा जा सके।
उत्तरी कश्मीर के सोपोर में भी युवाओं ने नमाज के बाद प्रदर्शन किया। पलहालन में प्रदर्शनकारियों ने श्रीनगर-बारामुला राजमार्ग पर प्रदर्शन करने की कोशिश की, लेकिन वहां पर पहले से तैनात सुरक्षा बल के जवानों ने इसे नाकाम कर दिया।
पुलवामा जिले के त्राल और कुलगाम जिले के अहरबल इलाकों में भी कौसर नाग यात्रा के विरोध में प्रदर्शन हुए। कश्मीर घाटी में हुए प्रदर्शनों के दौरान करीब दर्जन भर लोग घायल हो गए, जिनमें कई सुरक्षा बल के जवान भी शामिल हैं।
पुलिस ने करीब सभी अलगाववादियों को नजरबंद कर दिया है ताकि हालातों को काबू में रखा जा सके।
पारंपरिक मार्ग से मिले अनुमति
राज्य गृह सचिव सुरेश कुमार के कहा कि कश्मीर घाटी में यात्रा को लेकर जो भी हालत बने हैं, वह सिर्फ गलतफहमी का परिणाम हैं। समाज विरोधी तत्व इस संबंध में एक मुहिम चला रहे हैं, ताकि अमन शांति भंग हो सके।
उन्होंने सफाई पेश की कि कौसर नाग यात्रा का पारंपरिक मार्ग रियासी जम्मू से है, इसलिए यात्रा करने की अनुमति भी सिर्फ पारंपरिक मार्ग से ही दी जाएगी।
कुलगाम से जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा को रोका नहीं गया है बल्कि पारंपरिक रास्ते से 200 के करीब श्रद्धालु कौसर नाग झील पहुंचे, जहां उन्होंने नाग पंचमी की पूजा में भाग भी लिया।
मामले में भाजपा का कड़ा रुख
दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले से होने वाली वार्षिक कौसरनाग यात्रा को राज्य सरकारी की ओर से अनुमति न दिए जाने के विरोध में भाजपा ने कड़ा रुख अपना लिया है।
पार्टी नेताओं ने सरकार पर अलगाववादियों के आगे झुकने का आरोप लगाते हुए शनिवार को इस मामले में अहम घोषणा करने की बात कहीं है।
भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता डा. निर्मल कमल का कहना है कि कौसर नाग की पारंपरिक यात्रा को अनुमति रद्द करके नेकां कांग्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रियासत में कोई सरकार नाम की चीज नहीं है।
प्रवक्ता का कहना है कि राज्य सरकार ने एकतरफा कदम उठाकर 2008 में हुए श्री अमरनाथ भूमि विवाद जैसे हालात पैदा करने की कोशिश की है।
निर्मल कमल ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कौसरनाग यात्रा को अनुति रद्द करने का कड़ा विरोध होगा और इस संदर्भ में शनिवार को पार्टी कोई अहम घोषणा कर सकती है।
क्या है कौसर नाग यात्रा
कुलगाम जिले के अहरबल पर्यटक स्थल के निकट कौसर नाग झील है। नाग पंचमी पर रियासी जिले से सदियों से श्रद्धालु इस झील में नाग पंचमी पर स्नान कर नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए जाते रहे हैं।
अहरबल पर्यटक स्थल वाटर फाल की वजह से विख्यात है। पहली दफा कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के एक छोटे से संगठन ने कौसर नाग यात्रा कुलगाम से शुरू करने का एलान किया था।
जिसका हुर्रियत कान्फ्रेंस गिलानी और मीरवायज आदि धड़ों ने विरोध किया था।