नगर निगम जम्मू के दो विगों के आपसी तालमेल के अभाव में शहर में गंदगी पसरती जा रही है। कूड़ेदानों के अभाव में कूड़ा-कचरा इधर-उधर खुले में जमा कर दिया जाता है। इससे बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती है। सापु तौर पर कहें तो निगम के अधीन सभी 71 वार्डों में कूड़ेदानों की कमी है।
परिणामस्वरूप सड़कों के कि नारे और कलेक्शन प्वाइंटों में कूड़ा-कचरा खुले में बिखरा दिखना आम बात हो गई है। नवरात्रों के चलते शहर में पर्यटकों का आना-जाना लगा हुआ है लेकिन जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे होने से मंदिरों के शहर की खूबसूरती पर भी असर पड़ रहा है। कूड़ेदान के अभाव के चलते स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन निगम के संबंधित विंगों में इस मामले को लेकर आपस में कोई तालमेल दिखाई नहीं पड़ रहा है।
सेनेटरी विंग का कहना है कि शहर में कूडे़दान मुहैया करवाने की जिम्मेदारी सीटीओ की है, जबकि सीटीओ का कहना है कि विंग उन्हें यह नहीं बता रहा कि कूड़ेदान रखने कहां पर हैं। विभागों के आपस के इस रवैये से शहर में सफाई व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न सा लगता दिखाई पड़ रहा है।
शहर में सफाई व्यवस्था और कू ड़ेदान की कमी को लेकर जम्मू नगर निगम के सेनेटरी विंग के इंचार्ज डा. मोहम्मद सलीम खान से जब बात की गई तो उन्होंने कहा, मैं इस बात से सहमत हूं कि शहर में कूड़ेदान की कमी है लेकिन यह हमारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सीटीओ ने इसे उपलब्ध करवाना है। सीटीओ दीपक गुप्ता से इस मामले पर प्रश्न किया गया तो उन्होंने कहा, हमने तो कुल दस कूड़ेदान जारी किए हैं, जिनमें से पांच तवी के इस पार और पांच उस पार के लिए हैं लेकिन हमें बताया तो जाए कि इन्हें रखवाना कहां-कहां पर है।
रेशम घर पार्क
कहने को तो पार्क लेकिन पहचान कूड़े के खुले कलेक्शन सेंटर से होने लगी है। रेशम घर में एक ही पार्क है, जहां लोग सुबह-शाम सैर करने, योग करने पहुंचते हैं। खासकर सीनियर सिटीजन पार्क में जरूर पहुंचते हैं। ऐसे में उसी पार्क के मुख्य गेट के पास ही खुले में कूड़े का कलेक्शन सेंटर बनाया हुआ है, जो पार्क में सैर करने पहुंचने वालों को चिढ़ाता है। गंदगी के ढेर से बदबू आती है। लोग सुबह-शाम पार्क में तरोताजा होने पहुंचते हैं लेकिन कूड़े का डंप उनका स्वागत करता है। निगम को चाहिए कि अगर कलेक्शन सेंटर ही रखना है तो कम से कम एक बड़ा कूड़ादान तो रखा ही जा सकता है।
जागरूकता की भी कमी
कृष्णा नगर इलाका, जहां बरसात शुरू होते ही लोगों को डर सताने लगता है कि नाला बंद हो जाएगा और उनकी दुकानों और घरों में पानी घुस जाएगा। चोक हुए नालों को खोलना तो निगम की टीम का काम है लेकिन इसके लिए स्थानीय लोगों को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि नाला तभी चोक होगा यदि नाले में कूड़ा-कचरा फेंकेंगे। कूड़ा नालों में न फेंके तो समस्या अपने आप हल हो जाएगी। इसलिए लोगों को भी जागरूक होना होगा।