हाईवे पर हुई मुठभेड़ में आतंकियों को मार गिराने के बाद सेना के अधिकारियों ने आपरेशन सफल होने का श्रेय पुलिस और सेना के संयुक्त अभियान को दिया। लेकिन इससे पहले दिन भर दोनों में आपसी तालमेल की कमी साफ दिखी। मौके पर मौजूद पत्रकार उस समय हैरान रह गए जब कुछ ही मिनटों के अंतराल से सेना और पुलिस की ओर से परस्पर विरोधी बयान आए।
सुबह 10.40 पर सैन्य प्रवक्ता मनीष मेहता ने बताया कि आतंकियों की संख्या लगभग दो है। उन्हें चारों तरफ से घेर लिया गया है। आपरेशन जारी है। मुश्किल से तीन-चार मिनट बाद जम्मू संभाग के आईजी दानिश राणा पत्रकारों से कह रहे थे कि यह आतंकी हमला नहीं, कोई संदिग्ध हलचल है। उन्होंने स्पेक्यूलेटिव फायरिंग शब्द का इस्तेमाल किया। हालांकि सेना के प्रवक्ता भी दोपहर तक हमले में मारे गए आतंकियों की पुष्टि करने से कतराते रहे।
जबकि दूसरी तरफ रक्षा मंत्री ने दिल्ली में बयान देकर दोनों आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि कर दी। शाम को आपरेशन खत्म होने के बाद भी पुलिस और सेना में कोई तालमेल नहीं दिखा। पुलिस ने सेना को हाईवे खोलने के लिए कहा, लेकिन सेना ने साफ तौर पर मना कर दिया। बाद में जबरदस्ती हाईवे खोल दिया गया। घटनास्थल से होकर आने वाले आईजी, जम्मू दानेश राणा ने कहा कि आतंकी हमले की कोई जानकारी नहीं। कोई संदिग्ध हलचल हो रही है।
आतंकियों की कोई सूचना नहीं मिली। जबकि सेना के प्रवक्कता कर्नल मुनिष मेहता ने उसके तुरंत बाद इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह आतंकी हमला है और दो आतंकी है। इसके बाद आईजी दो बार घटनास्थल का दौरा कर आए, लेकिन कोई बात नहीं की। आपरेशन खत्म होने के बाद सैन्य अधिकारियों ने ही इसकी जानकारी मीडिया को दी, आईजी यहां से गायब रहे।