माता वैंष्णों देवी की प्राकृतिक पिंडी
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माता वैष्णो देवी के यात्रियों को नए साल में भैरो घाटी रोपवे का तोहफा मिलेगा। रोपवे के शुरू होने पर उन्हें वैष्णो देवी के दरबार से भैरोनाथ (भैरो घाटी) मंदिर तक कठिन चढ़ाई से निजात मिलेगी। रोपवे से मात्र चार मिनट में दरबार से सीधे भैरो घाटी पहुंचा जाएगा। इसमें प्रति एक घंटे में आठ सौ यात्रियों को भवन से भैरो मंदिर तक ले जाने की क्षमता होगी। एक ही बार हवाई रूट से 42-45 यात्री जा सकेंगे।
नवंबर के पहले हफ्ते में स्विटजरलैंड से कंपनी के सदस्य पहुंच रहे हैं, जिनसे कांट्रैक्ट पर बची हुई औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद रोपवे को यात्रियों को समर्पित किया जाएगा। श्री माता वैष्णो देवी के आधार शिविर कटड़ा से श्रद्धालु बाणगंगा, चरण पादुका, अर्द्धकुंवारी, हिमकोटी, सांझी छत से होते हुए समुद्र तल से 5200 मीटर की ऊंचाई पर 13.0 किलोमीटर का सफर तय करके वैष्णो देवी के भवन में पहुंचते हैं। इसमें छह किलोमीटर का सफर तय करके अर्द्धकुंवारी से वैकल्पिक सीधे ट्रैक से अधिकांश यात्री भवन तक पहुंचते हैं। लेकिन एक बड़ी संख्या में यात्री अर्द्धकुंवारी से पुराने ट्रैक से हाथी मत्था की चढ़ाई तय करके भवन में पहुंचते हैं।
समुद्र तल से 6619 मीटर की ऊंचाई पर भवन से करीब तीन किलोमीटर की सीधी और कठिन चढ़ाई करके भैरोनाथ के मंदिर में पहुंचा जाता है। इसमें पैदल और घोड़ों से यात्री और सामान ले जाया जाता है। लेकिन यह पूरी वैष्णो देवी की यात्रा में सबसे सीधी चढ़ाई है, जिससे यात्री थक जाते हैं। इससे बड़ी संख्या में यात्री वैष्णो देवी के दर्शन करने के बाद सीधे कटड़ा वापस लौट जाते हैं। श्राइन बोर्ड ने भैरोनाथ के मंदिर में भक्तों की संख्या को बढ़ाने और यात्रा को सरल करने के लिए पैसेंजर रोपवे का निर्माण कराया है।