आंतरिक सुरक्षा को लेकर भले ही केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने रोहिंग्याओं को देश से बाहर निकलाने की बात की हो। लेकिन आधार कार्ड, वोटर कार्ड और लोकल सिमकार्ड पाकर इनके पैर शहर में मजबूती से जम चुके हैं।
पांच हजार के करीब जम्मू में बसे अधिकांश रोहिंग्याओं के पास पर्सनल फोन और मोबाइल सिमकार्ड हैं। सिमकार्ड की उपलब्धता के बारे में पूछे जाने पर किसी ने कहा- ‘स्थानीय लोगों की मदद से मिली’। तो किसी ने कहा- ’दूरसंचार कंपनियों के लोग बस्ती में आकर सिमकार्ड दे जाते हैं।’ ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई स्थानीय अपनी आईडी उन संदिग्ध लोगों को ऐसे ही दे देता है।
ऐसे में आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बड़ा खतरा माना जा सकता है। पूछे जाने पर कि क्या आपके पास आधार या वोटर कार्ड है, तो जवाब नहीं मिलता है। शहर में बसे रोहिंग्याओं के पास सिमकार्ड कैसे पहुंचा इसकी पड़ताल अमर उजाला टीम ने की तो भारी गड़बड़ी सामने आई।
जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की समस्या को लेकर अन्य राज्यों से आए लोगों के लिए सिमकार्ड पाना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में कौन से आईकार्ड से रोहिंग्याओं को सिम मिले, यह जांच का विषय है।