जम्मू। इलेक्ट्रिक बसों का सफर शहरवासियों से ज्यादा पर्यटकों को रास आ रहा है। रेलवे स्टेशन से कटड़ा के लिए चलने वाली बसों का राजस्व शहर में चलने वाली बसों से अधिक है। पिछले पांच दिन में इलेक्ट्रिक बसों के राजस्व में कटड़ा जाने वाली बसों से आया राजस्व अधिक है। कटड़ा के लिए जाने वाली इलेक्ट्रिक बसों के प्रति लोगों का रुझान देखते हुए इस रूट पर जेकेएसआरसीटी ने बसों की संख्या में भी इजाफा किया है।
त्योहारी सीजन में मां वैष्णो देवी के दर्शन करने हजारों की संख्या में लोग जाते हैं। इसके चलते ही जेकेएसआरटीसी ने रेलवे स्टेशन से कटड़ा तक इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू की। इलेक्ट्रिक बसों में सफर करना लोगों को काफी पसंद आ रहा है। जबकि शहर में चलने वाली बसों में यात्रियों की संख्या कम है। 20 अक्तूबर को कटड़ा के लिए छह इलेक्ट्रिक बसें चलीं, इनके एक-एक ट्रिप से 23 हजार पांच सौ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि शहर में नौ विभिन्न रूटों पर नौ बसें चलाईं, जिनसे 11 हजार 518 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। जेकेएसआरटीसी के एक अधिकारी ने कहा कि कटड़ा तक चलने वाली बसें सबसे अधिक राजस्व दे रही हैं। शहर में चलने वाली बसों में यात्री कम बैठ रहे हैं।
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किस दिन कितना राजस्व
20 अक्तूबर, 39 हजार 541 रुपये
19 अक्तूबर, 32 हाजर
18 अक्तूबर 27 हजार
17 अक्तूबर 41 हजार (इस दिन शहर में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल थी)
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शहर में चलने वाली बसों में रूट के नाम नहीं लिखे
शहर में चलने वाली इलेक्ट्रिक बसों में उसके रूट का नाम नहीं है। लोगों पता नहीं चलता है किस रूट पर बस जा रही है। इसके साथ निजी वाहनों के सह चालक की तरह कारपोरेशन के सह चालक आवाज नहीं लगाते हैं। कई बसों के अंदर लगी इलेक्ट्रिक डिस्प्ले काम नहीं करती है। डिस्प्ले में यात्रियों को बसें के रूट की जानकारी मिलती है।