फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jammu News: पक्की सड़क की दरकार, लोग पैदल चल रहे आरपार

विज्ञापन
विज्ञापन
सांबा। ब्लॉक सुंब के पहाड़ी गांव कनेर, ढेंड कनेर, जीड हंडड समेत कई ऐसे इलाके हैं, जिन्हें आज भी चलने के लिए पक्की सड़क नहीं है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन

लोगों ने बताया कि दनेई से कनेर तक लगभग पांच किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क 10 साल पहले बनाई गई थी लेकिन उसके बाद इसकी किसी ने भी सुध नहीं ली। लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी बरसात के दिनों में होती है। मिट्टी पर फिसलन हो जाती है। इससे पैदल चलने में भी काफी मुश्किल होती है। इन इलाकों में कई नाले भी हैं। नालों में भी पानी भर जाता है और बच्चे भी स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं। लोगों ने बताया कि बच्चों को स्कूल पहुंचने में लगभग तीन घंटे लग जाते हैं। अगर किसी भी इलाके में कोई बीमार हो जाता है तो उसे चारपाई में बिठाकर सड़क तक ले जाना पड़ता है। कई बार लोगों की समय पर इलाज न मिलने के कारण जान भी चली गई। लोगों ने बताया कि इलाके में नेता सिर्फ वोट लेने के लिए आते हैं। लोगों ने कहा कि वे इस संबंध में कई बार जनप्रतिनिधियों व विभाग के अधिकारियों से मिल चुके हैं लेकिन लोगों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अब लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस सड़क को जल्दी से जल्दी बनाया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।
बॉक्स

लगभग 10 साल पहले यह मार्ग शुरू हुआ था लेकिन उसके बाद इसकी कोई भी सुध नहीं ली गई। इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
-रंजीत सिंह पूर्व सरपंच कारड पंचायत


जब भी बरसात होती है तो मार्ग पर फिसलन होने के कारण चलना मुश्किल हो जाता है। अगर सड़क बन जाए तो कई गांवों के लोगों को राहत मिलेगी।
-कर्म सिंह निवासी कनेर


अगर इलाके में कोई बीमार हो जाता है तो उसे चारपाई में बिठाकर कई किलोमीटर तक पैदल रास्ता तय कर सड़क तक लाना पड़ता है। सड़क तक पहुंचने के लिए लगभग ढाई घंटे लग जाते हैं। अगर सड़क बन जाए तो लोगों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सकता है।
विज्ञापन

-रत्नों देवी निवासी कनेर

हमारे बच्चों को भी पढ़ने में काफी परेशानी होती है। जंगली रास्ता होने से हमें भी जंगली जानवरों का डर लगता है। पिछले साल चीते ने बच्चों पर हमला कर दिया था। कुत्तों ने बच्चों की जान बचा ली थी। अगर रास्ता बन जाए तो लोगों को लाभ होगा।
-रशपाल सिंह निवासी जीड हंडड


स्कूल पहुंचने के लिए लग जाते हैं तीन घंटे
दसवीं कक्षा के छात्र सौरभ सिंह ने बताया कि उन्हें अपने घर से स्कूल पहुंचने के लिए तीन घंटे लग जाते हैं। हमें रास्ते में जंगली जानवरों का डर भी लगता है। कई बार जंगली जानवरों से सामना भी हो जाता है लेकिन क्या करें। पढ़ने के लिए स्कूल आना ही पड़ता है। अगर सड़क बन जाए तो पढ़ने और आने जाने के लिए परेशानी नहीं होगी।

......................

हमारे इलाके के ज्यादातर बच्चे उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर पाते हैं। कारण यह है कि दूरदराज का पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण बच्चों को स्कूल आने जाने के लिए छह-सात घंटे लग जाते हैं। इस कारण बच्चे पढ़ने के बजाय दूसरे कामों में ज्यादा ध्यान देते हैं।
विज्ञापन

-सुरजीत सिंह निवासी कनेर ढेंड



..................
इस सड़क का प्रोजेक्ट भेजा गया था लेकिन जनसंख्या कम होने के कारण अप्रूवल नहीं हो पाई।
....एईई लोक निर्माण विभाग सांबा दरबारी लाल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें