मध्यरात्रि में होता है बसों का परिचालन, कम निगरानी के चलते तोड़े जा रहे नियम
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू से डोडा, किश्तवाड़ और रामबन रूट पर चलने वाली बसों में नियमों की अवहेलना हादसों को न्योता दे रही है। यात्री किराये से अतिरिक्त पैसा कमाने की चाह में चालक-परिचालक बसों में यात्री कम और सामान की ढुलाई ज्यादा कर रहे हैं। यात्रियों के साथ-साथ क्षमता से अधिक सामान सड़क हादसे का कारण बन सकता है।
जम्मू बस स्टैंड से किश्तवाड़ के पाडर सहित अन्य दूरदराज इलाकों के लिए बसें मध्यरात्रि दो बजे से चलना शुरू होती हैं। सभी सीटें फुल होने पर तय क्षमता से अधिक माल लादते हैं। इनमें सब्जियां, दुकानों का सामान तक होता है। मध्यरात्रि में परिचालन होने से रूट पर ट्रैफिक पुलिस व प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी कम रहती है, जिसका चालक लाभ उठा रहे हैं।
डोडा-किश्तवाड़ राजमार्ग का रूट काफी चुनौतीपूर्ण है। तीखे मोड़ होने पर नियमों की अनदेखी हादसों को न्योता दे रही है। जम्मू से इन जिलों के प्रतिदिन लगभग 80 बसों का परिचालन होता हैं। ज्यादातर बसें मध्यरात्रि से सुबह सात बजे चलती हैं। क्षमता से अधिक भार होने से बसों के पलटने व फिसलने का डर रहता है।
ट्रैफिक पुलिस और मोटर व्हील विभाग इन पर कार्रवाई नहीं कर रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर जिन पुलिस नाकों से होते हुए यह बसें जाती वहां भी उनकी जांच नहीं होती है। एआरटीसी जम्मू मुख्यालय रिहाना तबस्सुम ने कहा कि यात्री वाहन में चालक और यात्रियों के निजी सामान के अलावा अन्य किसी तरह सामान नहीं होत सकता। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हो रहा है तो जांच करेंगे। इसमें पुलिस की भी मदद लेंगे।
डोडा-किश्तवाड़ हाईवे पर हुए हादसे
- 14 सितंबर 2018 : किश्तवाड़ के दंदारन इलाके में मिनी बस खाई में गिर गई थी, 17 लोगों की मौत
- 01 जुलाई 2019 : किश्तवाड़ के सांगवारी इलाके में ओवरलोडेड मिनी बस खाई में गिरने से 35 यात्रियों की मौत
- 29 मार्च 2023 : रामबन जिले के बैटरी चश्मा इलाके के पास एसयूवी खाई में गिरने से 10 यात्रियों की मौत
- 05 नवंबर 2023 : डोडा जिले के अस्सर में यात्रियों से भरी एक बस सड़क से फिसल कर 300 फुट गहरी खाई में गिर गई थी। इसमें 39 यात्रियों की मौत और 19 घायल हुए थे