चिंताजनकः जान गंवाने वालों में सबसे ज्यादा जम्मू के, दस वर्षों में मरने वालों में 13.9 फीसदी अकेले इसी जिले के
अजय मीनिया जम्मू। शहर के अंबफला में 16 फरवरी को बस के कुचलने से महिला की मौत हो गई। 20 फरवरी को गाढीगढ़ में पुलिस कांस्टेबल को ई-बस ने कुचल दिया। 21 फरवरी को नरवाल में वाहन की चपेट से 5 साल के मासूम ने दम तोड़ दिया।
मांडा में 22 फरवरी को बस खाई में गिरने से चालक की मौत हो गई। एक सप्ताह में ही जम्मू में हादसों में चार जानें गईं। यातायात विभाग के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में रोज औसतन दो से 3 लोग हादसों में जान गंवा रहे हैं। प्रदेश के बीस जिलों में सबसे ज्यादा मौतें जम्मू जिले में हुईं। कुल मौतों में जम्मू का आंकड़ा 13.9 फीसदी है। यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्ती के बाद भी हादसे रुके नहीं हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीते दस वर्षों में प्रदेश में 9070 लोगों की मौत हुई। यानी हर माह औसतन 75 जानें गईं।
इनमें 60 फीसदी 18-45 वर्ष की आयुवर्ग व 7 फीसदी 14-17 वर्ष की आयुवर्ग के थे। 45 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के मृतकों का प्रतिशत 25 रहा।
जम्मू में 1264 मौतें
जम्मू में बीते दस वर्षों में 1264 लोगों की मौत हुई। प्रदेश में सबसे ज्यादा मौतें जम्मू में हुईं। 2020 और 2022 को छोड़ दें तो यहां प्रतिवर्ष मौतों का आंकड़ा सौ से ऊपर ही रहा। औसतन संख्या प्रतिवर्ष 126 से ज्यादा रही। यानी औसतन हर तीसरे दिन जम्मू में हादसे में मौत हुई।
तेज रफ्तार या नशे में गाड़ी चलाना, लापरवाही से ओवरटेक हादसों का सबसे बड़ा कारण हैं। यातायात नियमों के उल्लंघन से भी हादसे बढ़े हैं। पिछले वर्ष जम्मू में यातायात पुलिस ने नियमों के उल्लंघन पर 3 लाख से ज्यादा चालान काटे। जागरूकता अभियानों के बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं।
डीआईजी हसीब मुगल ने कहा कि प्रदेश में 15 लाख से ज्यादा वाहन हैं। अन्य प्रदेशों के वाहन जोड़ दें तो आंकड़ा 20 लाख से पार है। जिस हिसाब से वाहन बढ़े हैं, सड़कों का दायरा नहीं बढ़ा। जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। सड़कों के सुधार कार्य पूरे होने पर हादसों में कमी आएगी।