कुछ देर के लिए कुछ समझ नहीं आया कि अचानक क्या हो गया है। यही हाल दसवीं कक्षा की कनिका चिब का था। कनिका की दोनों टांगों और कूल्हे में गंभीर चोटें आई हैं। घायल छात्राएं दर्द से कराह रही थीं। कनिका ने बताया कि सुबह वह स्कूल गेट से थोड़ी दूरी पर थी, तभी अचानक एक बस कई वाहनों से टकराते हुए उसकी तरफ आ गई।
बेटी को इस हालत में देखकर विजय का भी बुरा हाल था। हादसे की सूचना पाकर जीएमसी पहुंचे विजय बार-बार बेटी को सांत्वना दे रहे थे। इस बीच इमरजेंसी वार्ड में भर्ती सातवीं कक्षा की जसलीन कौर भी काफी सहमी हुई थी। वह बार-बार बोल रही थी कि उसे कुछ नहीं पता क्या हुआ है।
मां गुरजीत कौर और पिता इंद्रजीत सिंह भी बेटी के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे थे। अंकल प्रीतपाल सिंह ने बताया कि हादसे की सूचना पाकर वह सीधे जीएमसी पहुंचे। घायल छात्राओं को इलाज देने के लिए स्कूल प्रशासन के लोग भी अस्पताल में मौजूद रहे। स्कूल से आए एक कर्मी ने बताया कि स्कूल प्रशासन की ओर से अमृतसर में इलाज के लिए दोनों छात्राओं को आर्थिक मदद दी गई है।
बच्चों को देखकर हर किसी का दिल पसीज जाता है। जीएमसी की इमरजेंसी के बाहर बुधवार को यह नजारा दिखा। बस हादसे की घायल सिमरन जीत कौर और कनिका चिब को अमृतसर रेफर करते समय हर कोई मदद के लिए आगे आया। इमरजेंसी में पहुंचे अन्य तीमारदारों ने भी दोनों बच्चियों को भीतर से बाहर लाने और एंबुलेंस में डालने में मदद की।