कोर्ट ने कहा कि नाबालिग जहां तहां स्कूटी, बाइक चलाते नजर आते हैं। ट्रैफिक सिगनल हो या फिर पुलिस नाका, यह नाबालिग किसी अन्य वाहन की आड़ लेकर भागते नजर आते हैं। ऐसे में इन्हें रोकना इनकी जान को जोखिम में डालता है। यह अपनी जान के लिए खतरा तो होते ही हैं, अन्य चालकों की जान को भी जोखिम में डाल देते हैं। अभिभावकों को देखना होगा कि किसी भी सूरत में उनके बच्चे इस जोखिम को न उठाएं।
अदालत ने कहा कि क्राइम इंडिया रिपोर्ट के अनुसार देश भर में सड़क हादसों में पिछले तीन वर्ष में 3.92 लाख लोगों की मौत हुई है। वर्ष 2020 में ही 1.20 लाख लोगों ने जान गंवाई है। यह आम नागरिकों और समाज को देखना होगा कि यातायात नियमों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। पुलिस या सरकारी एजेंसियों के पास इतना अमला या व्यवस्था नहीं है कि वह एक-एक नागरिक से यातायात नियमों का पालन करवाए।