केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में कहा कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराना चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है और उसने वहां मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण शुरू कर दिया है।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने डीएमके के ए. गणेशमूर्ति के सवाल के लिखित जवाब में बताया, कश्मीर में हालात सामान्य होते ही वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहां चुनाव कराने का निर्णय चुनाव आयोग को लेना है। केंद्र सरकार ने परिसीमन आयोग का गठन किया था। इसने 14 मार्च और 5 मई को अधिसूचना जारी कर केंद्र शासित प्रदेश में संसदीय और विधानसभा सीटों का पुनर्गठन किया है। इसी के बाद मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया जा रहा है।
एक अन्य सवाल के जवाब में राय ने कहा, केंद्र सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है और जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा हालात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2018 में वहां आतंकी हमले की 417 वारदात हुई थीं, जो 2021 में घटकर 229 रह गई हैं। हालात में सुधार के लिए सरकार कश्मीर घाटी में मजबूत सुरक्षा और खुफिया ग्रिड की स्थापना, आतंकियों के खिलाफ सक्रिय कार्रवाई, रात्रि गश्त बढ़ाने और सुरक्षा बलों के अधिक सतर्कता बरतने जैसे कदम उठा रही है।
जम्मू-कश्मीर के चौतरफा विकास के लिए भी केंद्र सरकार कदम उठा रही है। इसमें 2015 में घोषित प्रधानमंत्री पैकेज लागू करना भी शामिल है। राज्य में आईआईटी और आईआईएम, दो नए एम्स की स्थापना, सड़कों व बिजली के लिए आधारभूत ढांचा परियोजनाओं की शुरुआत की गई है। जम्मू कश्मीर के औद्योगिक विकास के लिए 28,400 करोड़ रुपये लागत वाली नई केंद्रीय योजना पर अमल किया जा रहा है। इससे 4.5 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।