राज्य सरकार के इस फैसले से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। घरेलू पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। घाटी के हालात के मद्देनजर घरेलू पर्यटकों ने कश्मीर का रुख करना लगभग बंद कर दिया है। पिछले दिनों कुछ विदेशी पर्यटक डल झील पहुंचे थे। अनुच्छेद 370 हटने के बाद विदेशी व घरेलू पर्यटकों की ओर से लद्दाख को ज्यादा पसंद किया जा रहा है।
घाटी में सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही भी शुरू हो गई है। टीआरसी में 25 अतिरिक्त काउंटर खोले गए हैं। प्रत्येक जिले में लोगों की सुविधा के लिए 25 इंटरनेट कियोस्क स्थापित किए गए हैं। सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति पर नजर रखी जा रही है।
बीडीसी चुनाव को लेकर भी लोगों के बीच उत्साह है। सभी एआरओ को मोबाइल फोन उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी प्रकार का व्यवधान न हो। जेल में बंद नेताओं से मिलने के लिए पार्टियों को अनुमति दी गई है। ज्ञात हो कि पांच अगस्त से राज्यपाल रोजाना शाम छह से आठ बजे तक दो घंटे राज्य के हालात तथा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करते हैं।
वहीं राज्य प्रशासन ने पांच अगस्त से नजरबंद तीन नेताओं को आज रिहा कर दिया है। इन नेताओं में यावर मीर, नूर मोहम्मद और शोयब लोन शामिल हैं। अधिकारियों ने बुधवार देर रात बताया कि ये तीनों नेता पांच अगस्त से हिरासत में थे और इनको रिहाई के लिए मुचलका भी भरना होगा।
यावर मीर रफियाबाद विधानसभा सीट से पीडीपी के पूर्व विधायक हैं। जबकि शोयब लोन ने उत्तरी कश्मीर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा बाद में पार्टी से इस्तीफा दे दिया। लोन को पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन का करीबी माना जाता था।
तीसरे नेता नूर मोहम्मद नेशनल कांफ्रेंस कार्यकर्ता हैं और श्रीनगर शहर के उग्रवाद प्रभावित बटमालू क्षेत्र में पार्टी का चेहरा हैं। तीनों नेता शांति और अच्छे व्यवहार बनाए रखने के लिए हलफनामा भी देंगे। इससे पहले 21 सितंबर को पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के इमरान अंसारी और सैयद अखून को स्वास्थ्य आधार पर राज्य प्रशासन ने रिहा किया था।
केंद्र सरकार के 5 अगस्त के फैसले के बाद राजनेताओं, अलगाववादियों, कार्यकताओं और वकीलों सहित एक हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था। इन बंदियों में तीन पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती शामिल हैं। इन बंदियों में 250 से अधिक जम्मू और कश्मीर के बाहर की जेलों में भेजे गए हैं। डॉ. फारूक अब्दुल्ला को बाद में जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था।