अलगाववादियों की गावकदल में 28 साल पहले हुए नरसंहार के खिलाफ बंद का भरपूर असर रहा। दुकानें बंद रही और सार्वजनिक वाहन भी नहीं चले। हालांकि प्रशासन ने सात थाना क्षेत्र में धारा 144 लगा रखी थी। पुलिस ने अलगाववादियों का मार्च भी रोका। मृतकों को बसंत बाग स्थित एक मेरिज हाल में श्रद्धांजलि दी गई।
आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस ने सुरक्षा बलों ने 52 लोगों को मौत की घाट उतारने की घटना पर रविवार को घाटी के कई क्षेत्रों में बंद रहा। 21 जनवरी 1990 में हुई इस घटना में 250 लोग घायल हो गए। सुबह ही अलगाववादी नेताओं ने रैली निकालने का प्रयास किया।
पुलिस ने पहले से ही खान्यार, रैनावाड़ी, नौहट्टा, सफाकदल, एमआर गुंज, मैसुमा और करानल खुड थाना क्षेत्र में धारा 144 लगा दी थी। जैसे ही अलगाववादी नेता जमा होने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने का भरपूर प्रयास किया। इन नेताओं ने मार्च निकालना शुरू किया। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के कारण मार्च विफल हो गया। किसी तरह से कुछ लोग बसंत बाग तक पहुंचने में सफल रहे।