चार महीने के इंतजार के बाद आखिरकार बुधवार को लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के प्रतिनिधियों की केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लद्दाख के मुद्दों पर बुधवार को दिल्ली में अहम बैठक हुई। बैठक में शामिल लद्दाख के प्रतिनिधियों ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच वार्ता में कहीं कोई तल्खी नजर नहीं आई। मृह मंत्रालय ने मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है।
कर्तव्य भवन-3 में आयोजित यह बैठक लेह में 24 सितंबर को हुई हिंसा के बाद लद्दाख के नेतृत्व और गृह मंत्रालय (एमएचए) के बीच पहली औपचारिक वार्ता है। हाई पावर कमेटी की इस बैठक में लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधियों ने लद्दाख को पूर्ण राज्य के दर्जे के साथ ही संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की पुरानी मांग उठाई। उन्होंने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत लगाए गए आरोपों को खारिज किए जाने के साथ ही लेह हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने की भी मांग रखी। बैठक में शामिल नेताओं ने बताया कि पिछली बैठकों के विपरीत गृह मंत्रालय के अधिकारियों का रुख सकारात्मक दिखा। उन्होंने उनकी मांगों पर उच्चस्तर पर कार्रवाई कराने का भरोसा दिलाया। जल्द ही एक और बैठक बुलाए जाने पर सहमति बनी।
बैठक में शामिल लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान ने कहा कि केंद्र सरकार के नुमाइंदों के लहजे में लद्दाख के मुद्दों को लेकर गंभीरता झलकी है। हमने अपनी सभी मांगों को गृह मंत्रालय के सामने रखा है। उम्मीद है कि अगली बैठक में मांगों पर कुछ न कुछ निर्णय अवश्य होगा। सांसद ने कहा कि गृहमंत्रालय के अफसरों ने सभी मुद्दों पर बगैर किसी टालमटोल के सुनवाई का भरोसा दिया है। कहा कि एक ही बैठक में समाधान नहीं निकलेगा। बातचीत में समय लगता है। अगली बैठक की तिथि जल्द ही घोषित की जाएगी।
थुपस्तान ने की प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई
लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई लेह एपेक्स बॉडी के अध्यक्ष थुपस्तान छेवांग ने की। इसमें बौद्ध बहुल लेह और शिया बहुल कारगिल, दोनों क्षेत्रों के वरिष्ठ राजनीतिक प्रतिनिधि शामिल थे।
बैठक के मिनट्स जारी करने पर जोर
लद्दाख के प्रतिनिधियों ने अपनी जमीन, संस्कृति और रोजगार के लिए सांविधानिक गारंटी पर अपनी बातें रखीं। उनका कहना था कि वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होने पर लद्दाख में इन सुरक्षा उपायों का वादा किया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने अनिर्णायक दौरों की पुनरावृत्ति से बचने के लिए बैठक के मिनट्स जारी करने के साथ समय सीमा तय करने और फैसले लागू करने पर जोर दिया।
आरक्षण को लागू किए जाने पर भी चर्चा
लद्दाख में आरक्षण को लागू किए जाने पर भी प्रतिनिधियों की गृह मंत्रालय के नुमाइंदों के साथ चर्चा हुई। कुछ माह पहले केंद्र सरकार की ओर से लद्दाख के बेरोजगारों को रोजगार के लिए डोमिसाइल नीति घोषित की गई थी, जिसमें उन्हें आरक्षण की घोषणा की गई थी।