बाबा कैलख देव मंदिर परिसर में तीन दिवसीय भगवान शिव की कथा शुरू
दोमाना। प्रभु की कृपा से ही कथा सुनने का अवसर मिलता है। यह प्रवचन बाबा कैलख देव मंदिर परिसर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज के शिष्य विज्ञानानंद ने किए। उन्होंने कहा कि संतों के सानिध्य से ही प्रभु भक्ति की समझ मिलती है।
वीरवार को कैलख देव प्रबंधक कमेटी की ओर से शुरू तीन दिवसीय भगवान शिव कथा का शुभारंभ किया गया। इसमें शिष्य विज्ञानानंद ने माता सती का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि ईश्वर तर्क-वितर्क, बुद्धि, मन और वाणी से परे हैं। प्रभु श्री राम को वन में लीला करते देख भगवान शिव नमन करते हैं जबकि, भ्रमित माता सती उनकी परीक्षा के लिए माता सीता का रूप धारण करती हैं। प्रभु श्रीराम साधारण मनुष्य की भांति स्वर्ण मृग के पीछे दौड़ कर रावण को भ्रमित करते हैं, जबकि माता सती के समक्ष ईश्वरीय रूप को उजागर करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रभु दर्शन के लिए दिव्य नेत्र का जागृत होना आवश्यक है। यह सतगुरु की कृपा से ही संभव है। स्वामी सुकर्मआनंद, महात्मा रमनदीप, महात्मा गुरप्रीत, सुनील ने भजन सुनाए। आरती कर संगत में प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर महामंत्री देव प्रबंधक कमेटी शक्ति दत्त शर्मा, स्वामी सुचेतानंद, कमेटी प्रधान रामपाल सेठ, कुलदीप सिंह चिब, पवन गुप्ता, सतीश गुप्ता, विजय गुप्ता, आशीष, रमन कांत मन्हास मौजूद रहे।