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Jammu News: माता सती की कथा सुन संगत हुई मंत्रमुग्ध

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श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर में शिव महापुराण कथा का पांचवां दिन
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संवाद न्यूज एजेंसी

जम्मू । श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर में शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन मंगलवार को संगत को माता सती की कथा सुनाई गई। पंडित मनोज शुक्ला ने कथा सुना संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रजापति दक्ष की 60 पुत्रियां थी। सबसे छोटी बेटी सती थीं। प्रजापति के न चाहने पर भी माता सती की शादी भगवान शिव से होती है। तभी ब्रह्मा जी बैठक कर प्रजापति को नायक बनाते हैं। प्रजापति को सभी बधाई देते हैं। लेकिन शिव जी के ऐसा न करने पर गुस्साए प्रजापति दक्ष चले जाते हैं।
एक बार भगवान शिव अपने इष्ट को याद कर रहे होते हैं। तभी माता सती कहती हैं कि आप संसार के पिता हैं तो फिर राजा के पुत्र की पूजा क्यों कर रहे हैं। शिव जी श्रीराम जी के स्वरूप से माता को अवगत करवाते हैं। पर माता सती माता सीता का रूप धारण कर भगवान राम की परीक्षा लेने पहुंच जाती हैं। श्रीराम जी माता सती को कहते हैं कि भगवान शिव क्यों नहीं आए तो माता सती श्रीराम जी के नारायण रूप को देख भगवान शिव के पास जाती हैं। पर माता सीता का रूप धारण करने के चलते भगवान शिव माता सती को इस जन्म में पत्नी रूप में स्वीकार न करने का प्रण लेकर 87000 साल के लिए समाधि ले लेते हैं। इस बीच माता सती भगवान राम से वरदान लेतीं हैं कि हर जन्म में उनको पति रूप में भगवान शिव ही मिलें।
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एक बार प्रजापति दक्ष यज्ञ करते हैं। वह माता सती और भगवान शंकर को छोड़ सभी देवी-देवताओं को बुलाते हैं। माता सती यज्ञ में जाना चाहती हैंं। शिव जी उन्हें कहते हैं कि जहां विरोध हो वहां बिना बुलाए नहीं जाना चाहिए। माता के जिद्द करने पर शंकर जी गणों के साथ माता को जाने देते हैं। पर वहां कोई माता को नहीं बुलाता। माता सती यज्ञ में हर जगह अपने पति का स्थान ढूंढ़ती हैं। जब नहीं मिलता तो योग अग्नि जला खुद को भस्म कर लेती हैं। गुस्साए भगवान शिव अपनी जटा से वीरभद्र को प्रकट करते हैं। वीरभद्र यज्ञ को भंग कर प्रजापति दक्ष का सिर काट देते हैं। भगवान शिव यहां आते हैं तो सभी देवता उनकी पूजा करते हैं। यज्ञ संपन्न करवाने की बिनती करते हैं। इस पर भगव शिव दक्ष को सिर की जगह बकरी का सिर लगाकर यज्ञ पूर्ण करवाते हैं।
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