जम्मू। गणेश चतुर्थी पर घर, मंदिर और सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित गणपति महाराज की मूर्तियों का विसर्जन रविवार को धूमधाम से किया गया। गणपति बप्पा मोरया... मंगल मूर्ति मोरया... अगले बरस तू जल्दी आ के जयघोष से मंदिरों का शहर गूंज उठा। भक्तों ने शोभा यात्राएं निकालकर तवी नदी और अखनूर के चिनाब दरिया में गणपति विसर्जन कर प्रभु से सुख-समृद्धि की मंगल कामना की। शहर के गांधीनगर स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर और छन्नी स्थित पंच मंदिर में स्थापित मूर्ति का विसर्जन अखूनर स्थित चिनाब दरिया में किया गया।
रविवार को शहर के विभिन्न स्थानों में स्थापित गजानन की मूर्तियों को विसर्जन के लिए अखनूर और तवी नदी ले जाया गया। ढोल और रंग-गुलाल उड़ाते हुए झांकियां निकलीं। शहर के छन्नी स्थित पंच मंदिर में स्थापित भगवान गणेश की 12 फुट की मूर्ति को अखनूर में विसर्जित किया गया। मंदिर से गणेश की प्रतिमा को फूलों से सजाकर वाहन से अखनूर ले जाया गया। लक्ष्मी नारायण मंदिर से भी शाही अंदाज में शोभायात्रा निकाला गई। इस पहले सुबह मंदिर में भगवान की पूजा-अर्चना की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। वहीं, पुराने शहर में सनातन धर्म नाटक समाज की ओर से स्थापित मूर्ति का हरकी पोहड़ी में विसर्जन किया गया। इस दौरान शोभायात्रा निकाली गई जो शहर के विभिन्न स्थानों से निकली।
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तवी किनारे लगा मेला
उमड़ी भक्तों की भीड़
रविवार को तवी नदी किनारे मेले जैसा माहौल रहा। सुबह दस बजे के बाद नदी में गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन करने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे इस दौरान नाचते-गाते भक्तों ने प्रभु का गुणगान किया। भक्तों ने गणपति बप्पा से कोरोना महामारी से मुक्ति की कामना की। नौ दिन तक घर में भगवान की मूर्ति स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई।
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पीओपी से बनी मूर्ति का नहीं
करने दिया नदी में विसर्जन
तवी किनारे विसर्जन को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम भी तैनात रही। इस दौरान पहुंचे श्रद्धालुओं को पीओपी से बने गणेश का नदी में विसर्जन नहीं करने दिया गया। इस दौरान दिशा एनजीओ और जीजीएम साइंस कॉलेज के छात्र भी मौजूद रहे। उन्होंने लोगों को पीओपी से बने गणेश से नदी को होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया।