अलगाववादियों के विरोध के बीच कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के सरकारी प्रयास तेज कर दिए गए हैं। टाउनशिप के लिए जमीन की तलाश में तेजी आ गई है। दो चरणों में इनके पुनर्वास की व्यवस्था की योजना है। पंपोर इलाके में लगभग 500 कनाल जमीन देखी जा रही है।
इसके साथ ही राज्य सरकार कुछ अन्य सुरक्षित स्थानों पर भी जमीन तलाश कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी एक दिन पहले ही इस बात की पुष्टि की है कि राज्य सरकार पहले चरण में 50 एकड़ जमीन देने को तैयार हो गई है।
सरकार से जुड़े आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार श्रीनगर के बाहरी इलाकों में कश्मीरी पंडितों को बसाना चाहती है। इसके साथ ही दक्षिणी कश्मीर में भी इनके लिए सुरक्षित स्थान की तलाश की जा रही है।
टाउनशिप में सभी प्रकार की सुविधाएं होंगी
टाउनशिप में सभी प्रकार की सुविधाएं होंगी। स्कूल, हास्पिटल, मार्केट, बैंक आदि के इंतजाम टाउनशिप में ही रहेंगे। सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार यह चाहती है कि कश्मीरी पंडितों की ससम्मान वापसी हो। उनके मन में किसी प्रकार का डर भय न रहे।
उन्हें इस प्रकार का माहौल दिया जाए कि वे पुनर्वास से न झिझकें। उन्हें टाउनशिप में आने में सुरक्षा का अभाव न दिखे। सूत्रों ने बताया कि इसके लिए कश्मीरी पंडितों से बातचीत कर पुनर्वास का माहौल तैयार करने की पहल भी की जाएगी।
अलग-अलग संगठनों से राय मशविरा किया जाएगा। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू का कहना है कि यदि वाकई में सरकार पंडितों के पुनर्वास के प्रति गंभीर है तो उसे बयानबाजी बंद करनी चाहिए। पुनर्वास के लिए समयबद्ध कार्यक्रम घोषित करना चाहिए।
समय-समय पर पुनर्वास की बनी योजना
कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए समय-समय पर योजना बनी है। 2004 में जम्मू में 5242 आवास विस्थापितों को आवंटित किए गए। केंद्र सरकार की ओर से 2008 में वापसी के लिए 1618 करोड़ के पैकेज की घोषणा की गई थी।
इसमें घर बनाने के लिए साढ़े सात लाख रुपये की सहायता राशि मिलती। जम्मू, दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में पंडितों के 62 हजार परिवार रह रहे हैं।
इसके साथ ही कश्मीर में मौजूदा समय में 7247 कश्मीरी पंडित मिली-जुली संस्कृति का हिस्सा बनकर रह रहे हैं। इनमें अनंतनाग में 638, गांदरबल में 157, पुलवामा में 395 और बडगाम में 870 कश्मीरी पंडित हैं।