श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार हंगुल और अन्य संकटग्रस्त खुर वाले जीवों के संरक्षण पर दूसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की सिफारिशों पर शीघ्र कार्रवाई करेगी। ताकि अगले सम्मेलन के आयोजन से पहले राज्य पशु हंगुल और मार्खोर की आबादी में उल्लेखनीय प्रगति हो सके। मुख्यमंत्री स्कॉस्ट के शालीमार परिसर में तीन दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
देश-विदेश से आए संरक्षण विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और प्रतिनिधियों की एक प्रतिष्ठित सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार सम्मेलन के परिणामों को अत्यंत गंभीरता से लेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, सरकार में अपने सहयोगियों की ओर से, मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि इस सम्मेलन से प्राप्त सिफारिशों को जल्द से जल्द लागू किया जाएगा। मुझे उम्मीद है कि जब हम अगली बार यहां मिलेंगे, तब तक हंगुल और मारखोर की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हो चुकी होगी।
उन्होंने कहा संरक्षण केवल जानवरों के बारे में नहीं है - यह मानव अस्तित्व के बारे में भी है। हांगुल, मारखोर या किसी भी संकटग्रस्त प्रजाति का संरक्षण अनिवार्य रूप से जीवन और उस नाजुक पारिस्थितिक संतुलन की रक्षा के बारे में है जिस पर हम निर्भर हैं।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि दाछीगाम राष्ट्रीय उद्यान के पास रहने के बावजूद, उन्होंने खुद हंगुल नहीं देखा। मैं ऐसी स्थिति नहीं चाहता जहां हमारे बच्चे और नाती-पोते इन प्रजातियों को केवल किताबों में छपी तस्वीरों के माध्यम से ही जानें, जैसे डोडो या ऊनी मैमथ। यह एक ऐसी त्रासदी होगी जिसकी हमें अनुमति नहीं देनी चाहिए।
ये फाइलों के एक विभाग से दूसरे विभाग में जाने का इंतजार नहीं करेंगे
मुख्यमंत्री ने कहा, जब तक शैक्षणिक अनुसंधान और सरकारी कार्यान्वयन के बीच तालमेल नहीं होगा, हम हंगुल जैसे शानदार जानवरों को खोने का जोखिम उठाते रहेंगे। हर प्रजाति किसी न किसी कारण से अस्तित्व में है। ये प्रजातियां फाइलों के एक विभाग से दूसरे विभाग में जाने का इंतज़ार नहीं करेंगी। हम नौकरशाही की देरी बर्दाश्त नहीं कर सकते। इस सम्मेलन के निष्कर्षों को तत्काल कार्रवाई में बदलना होगा।
200 प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतिनिधियों को उनकी भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया और आशा व्यक्त की कि ऐसे सम्मेलन अधिक बार आयोजित किए जाएंगे। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में 200 से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, मध्य पूर्व, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के प्रख्यात वन्यजीव विशेषज्ञ, संरक्षणवादी और जीवविज्ञानी शामिल थे। प्रतिभागियों ने हिमालयी क्षेत्र के हंगुल, मारखोर और अन्य संकटग्रस्त खुर वाले जानवरों के संरक्षण के लिए शोध और रणनीतियों पर अपने विचार साझा किए।
पर्वतीय वन्यजीव विज्ञान संस्थान का विमोचन
इस अवसर पर, मुख्यमंत्री ने ''''पर्वतीय वन्यजीव विज्ञान संस्थान'''' नामक एक विज़न दस्तावेज़ जारी किया और प्रतिभागियों को पुरस्कार और प्रशंसा प्रमाण पत्र वितरित किए। इस अवसर पर वन मंत्री जावेद अहमद राणा, मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी, एसकेयूएएसटी-कश्मीर के कुलपति प्रो. नज़ीर ए. गनी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुरेश गुप्ता और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ डॉ. गोंजालेज भी उपस्थित थे।
स्कॉस्ट में मौजूद लोग। संवाद