रियासी। बाबा बिड्डा जी के मंदिर परिसर में जारी श्रीमद्भागवत कथा में सूरज कौशल ने बताया कि भागवत कथा का अनुसरण तोते द्वारा किया गया था। उन्होंने बताया कि जब भगवान शिव माता पार्वती को कथा सुना रहे थे तो मां कथा सुनते हुए हुंकारों को भर रही थी।
कथा स्थल की एक तरफ तोते का अंडा पड़ा था। तीसरे दिन उसमें से तोता निकला। चौथे दिन की कथा सुनते हुए मां पार्वती की आंख लग गई। भगवान शिव की ओर से कथा जारी देख तोता हुंकार भरने लगा। जब इसका पता शिव को चला तो वह उसे मारने को तैयार हुए। तोता उड़ कर बद्रीनाथ धाम आ पहुंचा जहां पर उसे यह बताया गया कि जो कथा उसने सुनी है वह उसका ज्ञान लोगों तक पहुंचाएगा। सूरज कौशल ने बताया कि आज भी श्रीमद्भागवत कथा स्थल पर तोते का फोटो या फिर उसकी प्रतिमा को रखा जाता है।