हुर्रियत (म) के अध्यक्ष मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने कहा कि वह केंद्र सरकार के साथ बिना शर्त बातचीत करने को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि बातचीत सफल होने का सबसे अच्छा तरीका है अगर वाजपेयी फार्मूला अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि वाजपेयी फार्मूले में सभी पार्टियों को शामिल किया गया था और साथ ही कश्मीरी अलगाववादियों को नई दिल्ली के साथ-साथ पड़ोसी मुल्क के इस्लामाबाद और पीओके में बैठे लोगों से भी बातचीत करने की अनुमति दी गई थी।
मीरवाइज ने सोमवार को कहा कि वह बातचीत के लिए एकतंत्र हो, जिसमें हर कोई शामिल हो। उन्होंने कहा कि हम इसे सिर्फ एक तस्वीर का अवसर नहीं बनाना चाहते हैं। मीरवाइज ने यह भी कहा कि हमें परिणाम की चिंता छोड़ बातचीत की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए, लेकिन प्रक्रिया ईमानदारी से होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को वाजपेयी के समय की फाइलें पढ़ने की जरूरत है और जिस तरह से वाजपेयी फार्मूला इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत की बात करता था, उसी दायरे में रहकर बातचीत आगे बढ़नी चाहिए, क्योंकि यही एक चाबी है सफलता पाने के लिए।
मीरवाइज जोकि अहिंसा की बात करते हैं, ने कहा कि कश्मीर मुद्दा एक राजनीतिक मुद्दा है और इसे सैन्य दृष्टिकोण से नहीं सुलझाया जा सकता। उन्होंने कहा कि लाल किले से जो प्रधानमंत्री का बयान आया था वो सराहनीय है, जिससे हमें लगा कि सरकार कश्मीर के बारे में सोच रही है, लेकिन उसके बावजूद भी यहां कोई बदलाव नहीं है।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि कश्मीर में होने वाली हर हरकत को पाकिस्तान के इशारों पर संचालित करवाया माना जाता है, लेकिन जो कश्मीर की जनता की आकांक्षाएं हैं, उन्हें लोगों को समझाना मुश्किल है। युवा यहां रहकर भी बंदूक उठाते हैं, इसके पीछे का कारण जानने की जरूरत है। गौरतलब है कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा बातचीत को लेकर आए बयान के बाद भी मीरवाइज ने उनके इस बयान का स्वागत किया गया था।