गर्भावस्था के दौरान होने वाला एक दुर्लभ कैंसर कोरियोकार्सिनोमा पहली बार एक 23 वर्षीय युवक में पाया गया है। यह कैंसर आमतौर पर गर्भाशय में भ्रूण के ऊतकों से विकसित होता है और महिलाओं में भी बेहद कम देखने को मिलता है। प्रति एक लाख महिलाओं में मात्र 0.3 प्रतिशत में ही इसके होने का आंकड़ा है। पीड़ित युवक समीर आनंद का जम्मू स्थित राज्य कैंसर संस्थान में वरिष्ठ मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. राजीव गुप्ता की देखरेख में इलाज चल रहा है।
रिहाड़ी निवासी समीर एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में एकाउंटेंट हैं। इन्हें पहले पीठ में दर्द की शिकायत हुई। ऑर्थोपेडिक सर्जन ने इसे ऑफिस का काम बताकर दवा दी लेकिन जब दर्द पेट के निचले हिस्से तक फैल गया तो अल्ट्रासाउंड कराया गया। जांच में लिवर में चौथे स्टेज का कैंसर कोरियोकार्सिनोमा पाया गया। यह वही कैंसर है जो सामान्यतः गर्भावस्था के दौरान तब होता है जब भ्रूण का विकास रुक जाता है या अधूरा रह जाता है।
डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि समीर के केस में बीटा एचसीजी हार्मोन का स्तर छह लाख से ऊपर था जो इस कैंसर की पुष्टि करता है। उन्होंने कहा यह कैंसर पुरुषों में होना अपने आप में एक दुर्लभ घटना है। महिलाओं में भी इसके मामले काफी कम सामने आते हैं। समीर का इलाज तब तक जारी रहेगा जब तक बीटा एचसीजी हार्मोन का स्तर शून्य नहीं हो जाता। समीर आनंद ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि बीते दो महीने से इलाज चल रहा है और अब काफी बेहतर महसूस कर रहा हूं।
बीटा एचसीजी हार्मोन शून्य होने तक चलेगा इलाज
राज्य कैंसर संस्थान के वरिष्ठ मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि यह दुर्लभ केस मेडिकल साइंस में चुनौतीपूर्ण है। कोरियोकार्सिनोमा का पुरुष में मिलना अत्यंत असामान्य है। हार्मोन लेवल को शून्य तक लाना ही इलाज का लक्ष्य है। अब तक की उनकी जानकारी में यह पहला ऐसा मामला है।