रियासी। स्थानीय ओपन एयर थियेटर में हर वर्ष होने वाली ऐतिहासिक रामलीला में शामिल होने के लिए नगर के वार्ड 5 निवासी यश उपाध्याय मुंबई से आते हैं। मौजूदा समय में मुंबई के मलाड में रह रहे यश के अनुसार हर वर्ष जब तक वह रामलीला में आकर अपना सहयोग नहीं देते, उनको अधूरा सा महसूस होता है।
उन्होंने कहा कि रामलीला के साथ उनका लगाव बचपन से है। वह खानदान में चली आ रही कलाकारी की परंपरा को भी निभा रहे हैं। यश के अनुसार उनके दादा शिव शरण उपाध्याय सांस्कृतिक गायक के साथ पौनी में होने वाली रामलीला के प्रधान तथा निर्देशक थे। वहीं, उनके पिता मेला राम उपाध्याय ने रियासी में श्री दुर्गा नाटक मंडली के साथ वर्षों बतौर कलाकार काम किया। इस दौरान वह हनुमान की भूमिका निभाते थे। उन्होंने स्वयं लगभग पांच वर्ष की आयु से ही रामलीला में विभिन्न किरदारों को निभाना शुरू कर दिया था।
बताया कि युवा अवस्था में उन्होंने लक्ष्मण, अंगद तथा श्रवण का किरदार निभाया है। वहीं, भगवान विष्णु के बामन अवतार के किरदार को भी निभाया है। साठ वर्ष से ज्यादा समय से वह रामलीला के साथ जुडे़ हुए हैं। मुंबई में रहकर भी वह पैतृक गांव या रामलीला को नहीं भूले। मौजूूदा समय में वह मंडली के कलाकारों को रिहर्सल करवाते हैं। रामलीला के मंचन के दौरान पार्श्व संगीत का कार्यभार भी वही संभालते हैं।