संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। दीवान मंदिर में रामलीला संपन्न हो गई। महानवमी पर वेदवती-रावण संवाद, सीता हरण, रामसेतु, अगंद-रावण संवाद का मंचन किया गया। पर्दा उठते ही प्रभु राम माता अहिल्या का उद्धार कर पति के श्राप से मुक्त करते हैं जो इंद्रदेव के छल के कारण मिला था। इसी बीच रावण वेदवती को जंगल में अकेली पाकर सुंदरता का बखान करता है। वेदवती बार-बार चेतावनी देती हैं, लेकिन रावण नहीं मानता। वह सती वेदवती का गला पकड़ लेता है। इस पर वेदवती हुंकार भरती हैं और श्राप देती है कि अगले जन्म में वे उसकी मृत्यु का कारण बनेंगी। वहीं, सीताहरण देखकर दर्शक भावुक हो गए। स्वर्ण मृग को पाने की बात माता सीता प्रभु राम से करती हैं। मगर मृग असल में एक राक्षस होता है। मायावी आवाज को सुन कर सीता मां लक्ष्मण को प्रभु की रक्षा में भेज देती हैं। इसी दौरान रावण मां सीता को ले जाता है।
इसके बाद सागर पर रामसेतु का निर्माण किया जाता है। यह देखकर जय सियाराम से पंडाल गूंजने लगता है। जब सागर प्रभु को जाने के लिए जगह नहीं देता तब राम जी ब्रह्म अस्त्र चला कर सागर को सुखाने लगते हैं। इस पर सागर भगवान से क्षमा मांगते हैं और कहते हैं कि नल नील को वरदान है कि उनके द्वारा फेंकी कोई भी चीज पानी में नहीं डूबती इसलिए आप उनसे कह कर पत्थर फेंके, फिर सेतु का निर्माण किया जाता है। लंका में पहुंचते ही प्रभु अंगद को रावण से पास भेजते हैं और लंकापति उनका उपहास उड़ाता है। यहीं पर संवाद खत्म हो जाता है।