- डिजिटल दौर में भी राखी भेजने के लिए डाक विभाग पर भरोसा, जम्मू तवी डाकघर से देश-विदेश भेजी जा रहीं राखियां
- सात अगस्त से शुरू हुई बुकिंग, अब तक करीब 400 राखियां विदेश भेजी गईं पांच लाख रुपये की बुकिंग राशि जुटी
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। मोबाइल और इंटरनेट के दौर में भले ही भाई-बहन पलभर में शुभकामनाएं भेज सकते हैं, लेकिन राखी के धागे से जुड़ा भावनात्मक रिश्ता आज भी डाक के रास्ते कायम है। रक्षाबंधन से पहले जम्मू तवी डाकघर में राखियों की बुकिंग तेज हो गई है। जम्मू से देश के विभिन्न राज्यों के साथ ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा समेत अन्य देशों में रहने वाले भाइयों तक भी बहनों का प्यार डाक के जरिए पहुंच रहा है।
राखियों की सुरक्षित डिलीवरी के लिए डाकघर में विशेष व्यवस्था की गई है। वाटरप्रूफ कवर में राखियां भेजी जा रही हैं जिसकी कीमत करीब 10 से 15 रुपये प्रति कवर है। रोजाना 30 से अधिक बहनें स्पीड पोस्ट और अन्य डाक सेवाओं से राखियां बुक करा रही हैं। महाराष्ट्र, बंगलुरू और दिल्ली समेत अन्य राज्यों में पढ़ाई व नौकरी करने वाले भाइयों के लिए भी बड़ी संख्या में राखियां भेजी जा रही हैं। विदेशों में रहने वाले भाइयों के लिए भी राखियों की बुकिंग हो रही है। जम्मू तवी डाकघर के वरिष्ठ डाकपाल श्रवण कुमार भाटी ने बताया कि सात अगस्त से राखियों की बुकिंग शुरू हुई थी। अब तक करीब 400 राखियां विदेश भेजी जा चुकी हैं, जिनसे करीब पांच लाख रुपये की बुकिंग राशि एकत्रित हुई है। राखी भेजने पहुंचीं आरती देवी, कुसुम शर्मा और मालती ने कहा कि वीडियो कॉल और संदेश अपनी जगह हैं, लेकिन भाई की कलाई पर बंधने वाली राखी का एहसास अलग है। यही वजह है कि डिजिटल युग में भी डाक से राखी भेजने की परंपरा कायम है।