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राज्यसभा चुनाव: निर्दलीय विधायकों पर रहेगी निगाह... राजनीतिक दलों पर लागू होगा व्हिप; मेहराज भी डाल सकेंगे वोट

Sun, 19 Oct 2025 02:57 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय विधायकों पर निगाह रहेगी। राजनीतिक दलों पर व्हिप लागू होगा। निर्दलीय विधायकों में पांच सरकार के समर्थन में गिने जाते हैं तो दो विधानसभा में कश्मीर आधारित विपक्षी गुट के साथ जुड़े हैं।
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जम्मू कश्मीर राज्यसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राज्यसभा चुनाव में सबकी निगाहें निर्दलीय विधायकों पर हैं। सात निर्दलीय विधायक सदन में हैं और इनमें से एक सतीश शर्मा मंत्री बनाए गए हैं। खास बात यह है कि किसी भी राजनीतिक दल का व्हिप निर्दलीय विधायकों पर लागू नहीं होता है। 
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ऐसे में राज्यसभा के किस प्रत्याशी को उन्होंने वोट डाला इसकी जानकारी सार्वजनिक करना इन विधायकों के लिए आवश्यक नहीं है।नेकां और कांग्रेस के बीच समझौता निर्दलीय विधायकों की गोपनीयता को लेकर ही सिरे नहीं चढ़ पाया था और अंतिम क्षणों में कांग्रेस ने राज्यसभा की चौथी सीट पर चुनाव लड़ने से इन्कार कर दिया।

निर्दलीय विधायकों में पांच सरकार के समर्थन में गिने जाते हैं तो दो विधानसभा में कश्मीर आधारित विपक्षी गुट के साथ जुड़े हैं। सरकार का समर्थन करने वाले पांच विधायकों में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री सतीश शर्मा, प्यारे लाल (विधायक, इंदरवाल), मुजफ्फर खान (विधायक, राजोरी), चौधरी अकरम (विधायक, सुरनकोट) और डॉ. रामेश्वर सिंह (विधायक, बनी) शामिल हैं। 
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इन विधायकों ने 2024 का विधानसभा चुनाव किसी मान्यता प्राप्त या पंजीकृत पार्टी के टिकट पर नहीं लड़ा था और निर्दलीय के रूप में जीते थे। पिछले साल अक्तूबर में जब उमर अब्दुल्ला ने सरकार बनाने का दावा पेश किया था तब उन्होंने उन्हें समर्थन पत्र सौंपा था।विधानसभा में शेख खुर्शीद (विधायक, लंगेट) और शब्बीर अहमद कुल्ले (विधायक, शोपियां) विपक्षी गुट के साथ जुड़े दो निर्दलीय विधायक हैं। 

कुल्ले ने पार्टी का टिकट न मिलने पर विधानसभा चुनाव निर्दलीय के रूप में लड़ा था। दिलचस्प बात यह है कि 13 अक्तूबर को जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के राज्यसभा उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र जमा किया तो वे उनके साथ रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय भी गए थे। 
 

खुर्शीद की अवामी इत्तेहाद पार्टी का भारत के चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में कोई अस्तित्व नहीं है और उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।

 

मेहराज को राज्यसभा चुनाव में वोट डालने की मिली अनुमति
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत जेल में बंद विधायक मेहराज मलिक को राज्यसभा चुनाव में वोट डालने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति राजेश सेखरी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि रोकथाम के तहत नजरबंदी में रखे गए व्यक्ति को भी लोकतांत्रिक अधिकार के तहत मतदान का हक है।

 

अदालत ने कहा कि प्रशासन ने बताया है कि मलिक के लिए डाक मतपत्र जेल के जरिये पहले ही भेजा जा चुका है, जिससे वह 24 अक्तूबर को होने वाले राज्यसभा चुनाव में हिस्सा ले सकेंगे।
 

अदालत ने अपने आदेश में की धारा 62(5) का भी जिक्र किया। इस धारा में साफ कहा गया है कि जेल में बंद व्यक्ति वोट नहीं दे सकता, लेकिन रोकथाम वाली नजरबंदी में रखा गया व्यक्ति इस प्रतिबंध से बाहर है और उसे मतदान का अधिकार बना रहता है।

बता दें कि मलिक के परिवार की ओर से हाईकोर्ट में की गई याचिका में दो मांगें रखी गई थीं। पहली, उन्हें 23 से 31 अक्तूबर तक चलने वाले विधानसभा सत्र में शामिल होने की अनुमति दी जाए और दूसरी, उन्हें राज्यसभा चुनाव में वोट डालने दिया जाए। अदालत ने दूसरी मांग स्वीकार कर ली, लेकिन विधानसभा सत्र में शामिल होने पर अभी कोई फैसला नहीं दिया। 
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प्रशासन की ओर से दलील दी गई कि नजरबंद व्यक्ति को विधानसभा आने-जाने की अनुमति देना सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं होगा और यह नजरबंदी के मकसद को प्रभावित कर सकता है। अदालत ने इस पर फिलहाल आदेश टालते हुए अगली सुनवाई की तारीख 27 अक्तूबर तय की है। 

 
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