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राजोरी दिवस: शहीदों की शहादत को नमन... पाकिस्तानी कबायलियों से छह माह बाद मिली थी आजादी

Thu, 13 Apr 2023 04:40 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, राजोरी

सार

पाकिस्तानी कबायलियों के कब्जे से छह माह बाद आजादी मिलने और इस दौरान संघर्ष में मारे गए लोगों को नमन किया गया। शहर में होने वाले कार्यक्रम में शहरवासियों ने हिस्सा लेकर शहीदों को याद किया।
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Rajouri Day - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हर साल की तरह इस बार भी 13 अप्रैल को राजोरी दिवस मनाया जा रहा है। इस दौरान पाकिस्तानी कबायलियों के कब्जे से छह माह बाद आजादी मिलने और इस दौरान संघर्ष में मारे गए लोगों को नमन किया गया। शहर में होने वाले कार्यक्रम में शहरवासियों ने हिस्सा लेकर शहीदों को याद किया।

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वर्ष 1947 में देश के विभाजन के समय बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। पाकिस्तान ने मीरपुर पर कब्जा करने के बाद रेंजरों और कबायलियों को भेज कर 23 नवंबर 1947 को राजोरी शहर पर कब्जा कर लिया था। इस दिन दिवाली थी। आक्रमण के समय शहर के अल्पसंख्यक हिंदू और सिख परिवारों की हालत चिंताजनक थी। उन्होंने पुलिस से आत्मरक्षा के लिए हथियार व गोला-बारूद की मांग की, जिसे नकार दिया गया। 

शहर पर आक्रमण के बाद जब शहर वासियों को पता चला कि भारतीय सेना उनकी रक्षा के लिए नहीं पहुंच रही है, तो उन्होंने रात के अंधेरे में शहर छोड़ना शुरू कर दिया। भारी संख्या में अल्पसंख्यक शहर नहीं छोड़ पाए, जिनमें महिलाएं बच्चे व बुजुर्ग शामिल थे।
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सामूहिक धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया तो बड़ी संख्या में अल्पसंख्यकों ने जहर खाकर दी थी जान

पाकिस्तानी सेना व कबायलियों ने इस दौरान लोगों को सामूहिक धर्मपरिवर्तन के लिए मजबूर करना शुरू कर दिया। हर तरफ से निराश होकर बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने जहर खाकर सामूहिक आत्महत्या कर ली और अपने आत्मसम्मान की रक्षा की। राजोरी के गुज्जर मंडी स्थित आज जहां राणे हवाई पट्टी बनी है वहां पर हजारों अल्पसंख्यकों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। करीब 4000 लोग जो बचे थे, उन्हें पाकिस्तानी कबायलियों ने तलवारों, कुल्हाड़ी और खंजर से मौत के घाट उतार दिया था। करीब छह माह तक राजोरी शहर पर पाकिस्तानी कबाइलियों का कब्जा रहा।

भारतीय सेना ने मार्चा संभाला, 13 अप्रैल 1948 को दिलाई थी मुक्ति

राजोरी शहर को पाकिस्तानी सेना और कबायलियों के कब्जे से आजाद करवाने में भारतीय सेना के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया था। इसमें भारतीय वायुसेना का योगदान भी सराहनीय था। कई चुनौतियों को पार करते हुए भारतीय सेना के टैंक अचूक फायरिंग करते हुए नौशेरा से चिंगस और फिर वहां से राजेारी शहर में घुसे थे। इसके बाद आसपास की पहाड़ियों और राजोरी किले में मुक्त करवाया था। भारतीय सेना की वीरता के सामने पाकिस्तानी सेना और कबायली टिक नहीं पाए। इस तरह 13 अप्रैल 1948 को भारतीय सेना ने राजोरी को आजाज करवाया था। शहर की अवाम ने भी भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिला कर सहयोग दिया था। इसमें कई लोगों ने अपने प्राणों की आहुति भी दी थी।

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