जम्मू-कश्मीर में सेना से सिविलियन जमीन की वापसी, विस्थापित कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और नियंत्रण रेखा की स्थिति को लेकर वीरवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में रक्षा मंत्री मनोहर परिकर, राज्य के राज्यपाल एनएन वोहरा और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी मौजूद रहे ।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सेना द्वारा इस्तेमाल की जा रही सिविलियन जमीन की वापसी के मसले पर राज्य के मुख्य सचिव रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से बातचीत कर प्रस्ताव तैयार करेंगे। सेना पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के कार्यकाल में सैद्धांतिक रूप से 139 एकड़ के टाटू मैदान को खाली करने पर सहमत हो गई थी, लेकिन, इस बारे में अंतिम फैसला रक्षा मंत्रालय को करना है।
अब सूत्रों ने यह भी बताया कि टाटू मैदान की वापसी के बदले सेना खूबसूरत गुलमर्ग इलाके में जमीन के लिए दबाव बना रही है। इस बैठक में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और उनको बसाने के लिए जमीन की पहचान के मसले पर भी चर्चा की गई। देश में 62 हजार पंजीकृत विस्थापित कश्मीरी पंडित परिवार हैं।
ये परिवार 1990 के दशक में घाटी में आतंकवाद के कारण पलायन कर गए। इनमें से करीब 40 हजार पंजीकृत परिवार जम्मू में और 20 हजार परिवार दिल्ली में रहते हैं। दो हजार परिवार देश के अन्य हिस्सों में हैं।
इस उच्च स्तरीय बैठक में गर्मियों में सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशों की रिपोर्ट के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा की स्थिति पर भी चर्चा की गई। इसमें हाल में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में चार लोगों की मौत के बाद घाटी में अशांति के मसले पर भी मंथन हुआ। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि यह बैठक राज्य में चल रही विकास परियोजनाओं और अन्य मसलों की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी।