जम्मू-कश्मीर विधानसभा का सत्र शनिवार को शुरू होते की विपक्ष के विधायकों द्वारा बिजली की आपूर्ति को लेकर अपने-अपने इलाकों के मुद्दे स्पीकर के सामने रखे। विधायकों द्वारा मांग की कि इस पर गौर किया जाए। जैसे ही स्पीकर सदन में अपनी सीट पर बैठे, तो सबसे पहले कांग्रेस विधायक जीएम सरूरी अपनी सीट पर खड़े हुए और अपने इलाके में लोगों को पेश आ रही मुश्किल स्पीकर के सामने रखी।
उन्होंने कहा कि उनके वहां बलेसा का इलाका है, जहां पिछले कई दिनों से बिजली गुल है और पूरा इलाके अंधेरे में है। बिजली कटौती की चलते लोगों को रमजान के महीने में मुश्किल हो रही है। इसलिए इस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
विधायक असगर करबलाई ने भी बिजली की आपूर्ति की बात पर मुहर लगाते हुए कहा कि लद्दाख संभाग के द्रास में भी पिछले दो दिनों से बिजली गुल है और लोगों को पवित्र रमजान के महीने में काफी दिक्कत हो रही है। उन्होंने यहां तक कह डाला कि न बिजली, न पानी, न राशन। आखिर आम आदमी का बनेगा क्या।
भाजपा विधायक सत शर्मा ने कहा कि उनके इलाके में एक करोड़ की लागत से तीन रिसीविंग स्टेशन लगाए जाने थे, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उनके इलाके में तीन बड़े अस्पताल हैं, जिनमें जीएमसी जम्मू, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और डिस्ट्रिक्ट अस्पताल, जहां बिजली की काफी जरूरत है। शर्मा ने कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि रिसीविंग स्टेशन का काम क्यों नहीं शुरू किया गया।
विकार रसूल ने अपने इलाके की समस्या सदन में रखते हुए कहा कि उनके इलाके बनिहाल में रेलवे टनल के काम के चलते सभी पानी के चश्मे सूख चुके हैं और अब लोग हैंडपंपों पर निर्भर हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर हैंडपंप खराब हैं। पिछली बार भी यह मुद्दा उठाया था, उस समय आश्वासन दिलाया गया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
विधायक अल्ताफ ने स्पीकर से कहा कि कि उनके इलाके का पीडीडी का एक कैजुअल लेबर बशीर अहमद काम करते हुए सीढ़ी से गिर गया और उसकी मौत हो गई। उन्होंने उसके परिवार वालों के लिए मुआवजे या फिर किसी को उसकी जगह नौकरी देने की मांग की। साथ ही उन्होंने अशमुकाम में बादल फटने से हुए नुकसान में लोगों को मुआवजा देने की मांग की। विधायकों द्वारा रखी गई अपनी मांगों को स्पीकर द्वारा गंभीरता से सुना गया और सरकार को इस पर गौर करने के निर्देश दिए।