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बारिश ने किसानों की चिंताएं बढ़ाई

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बारिश से खराब हुइ धान की फसल दिखाते किसान - फोटो : RSPURA
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आरएस पुरा। दो दिन से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों की चिंता में बढ़ा दी है। अगर आने वाले दिनों में इसी प्रकार मौसम बना रहा तो इस बार खेतों में खड़ी धान की फसल की गुणवत्ता बेहतर नहीं होने पर भी उचित कीमत नहीं मिल पाएगी।
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किसानों का कहना है कि पहले ही बासमती के दाम काफी कम हैं और ऊपर से मौसम की मार ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसानों ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि खराब हुई फसल का उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से सुध नहीं ली गई। किसान प्रकाश चौधरी, लाल सिंह, अमर नाथ ने कहा कि बारिश के कारण धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि पहले ही बासमती के दाम काफी कम हैं और अब कुदरत की मार के चलते नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि पिछले दिनों तेज हवा के कारण उनकी फसल जमीन पर लेट गई और अब बारिश के कारण खराब हो रही है। किसानों ने सरकार से मांग करते हुए बारिश के चलते खराब हुई फसल का उचित मुआवजा मिलना चाहिए ताकि वह अगली फसल लगाने की तैयारी कर सकें। किसानों ने कहा कि खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। सरकार द्वारा उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। केंद्र व राज्य सरकार किसानों की आय दो गुना किए जाने के लिए बनाई योजनाओं को लागू किए जाने की दुहाई दी जा रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि किसानों द्वारा फसल लगाए जाने पर उसकी कीमत नहीं मिल रही।
धान की फसल को हुआ नुकसान
अखनूर। पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्र में बारिश से ठंड का प्रकोप बढ़ गई है। लोगों को कई परेशानियों का समाना करना पड़ा। दूसरी ओर धान की फसल को नुकसान हुआ है। शनिवार को सुबह से ही कोई क्षेत्र में बारिश हुई। जिस पर धान की कटी फसल को नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भर गया है। किसानों का कहना है बारिश से धान की फसल को नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल लगाने पर बारिश होने पर विलंब हो गया है। बारिश से खेतों में पानी आ गया है। ब्यूरो
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धान फसल तबाह होने की कगार पर पहुंची
गेहूं बिजाई में भी होगी प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
अरनिया। रुक-रुक कर हो रही बारिश से धान की फसल तबाह होने के कगार पर पहुंच गई है। दूसरी तरफ गेहूं फसल की बिजाई पर भी संशय बनना शुरू हो चुका है। किसानों के अनुसार अगर मौसम का मिजाज इसी प्रकार रहा तो धान की फसल को सही सलामत घर लाना तो दूर उल्टा गेहूं फसल पर भी प्रश्न चिह्न लग सकता है।
सप्ताह बाद फिर से शुरू हुई बारिश शनिवार तीसरे दिन भी जारी रही। इससे किसानों के चेहरे मुरझाना शुरू हो गए। वहीं खराब हुई फसल का मुआयना करने के लिए अभी तक राज्य प्रशासन विभागीय अधिकारियों का न पहुंचना भी क्षेत्र के किसानों को काफी खल रहा है। ओम प्रकाश, जीत राज, अतर सिंह, सांबरिया मोहन, रमेश कुमार, नारंजन सिंह व नरेश सैनी आदि किसानों ने कहा कि अरनिया कृषि प्रधान क्षेत्र होने से यहां के लोग जमींदारी पर निर्भर हैं। इसी से अन्य खर्चों के साथ बच्चों की पढ़ाई से लेकर पूरे साल में होने वाले खर्चे पर निर्भर हैं, मगर इस साल बेमौसम की बारिश ने खासतौर से विश्व विख्यात बासमती को लगभग तबाही के कगार तक पहुंचा दिया है।
वहीं खेतों में नमी रहने से गेहूं की फसल की बिजाई पर भी प्रश्न चिह्न लगना शुरू हो चुका है, जिससे आने वाले दिनों में हम किसानों की माली हालत काफी खराब हो सकती है।
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